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Koderma News : जिस विषैले सांप को बचाया, उसी ने सर्प मित्र शिबू पंडित को डंसा, सदर अस्पताल में चल रहा इलाज

Megha Sinha

Koderma News : कोडरमा में सर्प मित्र शिबू पंडित उस समय हादसे का शिकार हो गए, जब तीन दिन पहले रेस्क्यू किए गए विषैले सांप को जंगल में छोड़ने के दौरान उसी सांप ने उन्हें डंस लिया। समय पर इलाज मिलने से उनकी हालत फिलहाल खतरे से बाहर है।

Koderma News: कोडरमा के सर्प मित्र शिबू पंडित को उसी विषैले सांप ने डंस लिया, जिसे उन्होंने स्कूल से रेस्क्यू किया था। इलाज के बाद हालत स्थिर, वन विभाग से सुरक्षा किट की मांग।

कोडरमा: झारखंड के कोडरमा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने सभी को हैरान कर दिया है। लोगों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाले सर्प मित्र शिबू पंडित इस बार खुद एक विषैले सांप के शिकार हो गए। विडंबना यह रही कि जिस सांप को उन्होंने तीन दिन पहले रेस्क्यू कर सुरक्षित अपने कब्जे में लिया था, उसी सांप ने जंगल में छोड़े जाने के दौरान उन्हें डंस लिया। घटना के बाद उन्हें तुरंत कोडरमा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। राहत की बात यह है कि फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

विद्यालय से किया था विषैले सांप का रेस्क्यू

जानकारी के अनुसार, कोडरमा जिले के नवलशाही थाना क्षेत्र के देवीपुर-खेशमी गांव निवासी और सर्प मित्र शिबू पंडित ने 1 जुलाई को डगरनवां पंचायत के फुटलहिया स्थित नवसृजित प्राथमिक विद्यालय से एक विषैले सांप का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया था।

बताया गया कि इसी सांप ने विद्यालय के छात्र दिलीप मुर्मू को डंस लिया था। घटना की सूचना मिलने के बाद शिबू पंडित मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद विषैले सांप को सुरक्षित पकड़ लिया। उनके इस प्रयास से विद्यालय परिसर में मौजूद बच्चों, शिक्षकों और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।

छात्र की पुष्टि के लिए नहीं छोड़ा था सांप

आमतौर पर सर्प मित्र रेस्क्यू के बाद सांप को जंगल में छोड़ देते हैं, लेकिन इस मामले में शिबू पंडित ने ऐसा तुरंत नहीं किया। उन्होंने बताया कि वे यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि छात्र को काटने वाला सांप यही था, ताकि इलाज के दौरान डॉक्टरों को सही जानकारी मिल सके और किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने।

छात्र दिलीप मुर्मू के पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद शनिवार को उन्होंने सांप को प्राकृतिक आवास में छोड़ने का निर्णय लिया। इसके लिए वे चंचालधाम जंगल पहुंचे, जहां सांप को सुरक्षित छोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई।

जंगल में छोड़ने के दौरान हुआ हादसा

सांप को जंगल में छोड़ने के दौरान अचानक स्थिति बदल गई। जैसे ही शिबू पंडित सांप को मुक्त करने लगे, सांप ने पलटकर उन पर हमला कर दिया और उन्हें डंस लिया।

सांप के काटते ही शिबू पंडित को चक्कर आने लगे और घबराहट महसूस होने लगी। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और बिना देर किए उन्हें कोडरमा सदर अस्पताल पहुंचाया गया।

अस्पताल में डॉक्टरों ने तुरंत उपचार शुरू किया। चिकित्सकों के अनुसार समय पर अस्पताल पहुंच जाने के कारण उनकी स्थिति नियंत्रण में है और फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर है। डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं।

लोगों की जान बचाते-बचाते खुद बन गए शिकार

शिबू पंडित लंबे समय से कोडरमा और आसपास के क्षेत्रों में सर्प मित्र के रूप में कार्य कर रहे हैं। वे कई बार विषैले सांपों का रेस्क्यू कर लोगों की जान बचा चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जब भी किसी घर, स्कूल या सार्वजनिक स्थान पर सांप निकलता है, लोग सबसे पहले उन्हें ही सूचना देते हैं।

अपनी जान की परवाह किए बिना वे मौके पर पहुंचकर सांप को सुरक्षित पकड़ते हैं और बाद में उसे जंगल में छोड़ देते हैं। इस बार भी वे लोगों की सुरक्षा के उद्देश्य से अपना दायित्व निभा रहे थे, लेकिन दुर्भाग्यवश वही सांप उनके लिए खतरा बन गया।

वन विभाग से सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की मांग

इस घटना के बाद शिबू पंडित ने वन विभाग से महत्वपूर्ण मांग उठाई है। उनका कहना है कि सर्प रेस्क्यू का कार्य बेहद जोखिम भरा होता है, लेकिन अधिकांश स्वयंसेवक बिना किसी आधुनिक सुरक्षा उपकरण के यह जिम्मेदारी निभाते हैं।

उन्होंने मांग की है कि वन विभाग सर्प मित्रों को सेफ्टी किट, स्नेक हैंडलिंग टूल्स, सुरक्षा दस्ताने, फेस शील्ड, बूट, प्राथमिक उपचार किट और अन्य आवश्यक सुरक्षा संसाधन उपलब्ध कराए। उनका मानना है कि यदि सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं तो भविष्य में इस तरह की घटनाओं की संभावना काफी कम हो सकती है।

सर्प मित्रों की सुरक्षा पर उठे सवाल

कोडरमा की इस घटना ने एक बार फिर उन स्वयंसेवकों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो बिना किसी सरकारी संसाधन के वन्यजीव संरक्षण और लोगों की सुरक्षा का जिम्मा उठाते हैं।

ग्रामीण इलाकों में अक्सर विषैले सांप निकलने की घटनाएं होती रहती हैं। ऐसे समय में प्रशिक्षित सर्प मित्र ही लोगों के लिए सबसे बड़ी उम्मीद बनते हैं। लेकिन यदि उनके पास पर्याप्त सुरक्षा संसाधन नहीं होंगे तो उनका जीवन हमेशा खतरे में बना रहेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि सर्प रेस्क्यू करने वाले स्वयंसेवकों को नियमित प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण, बीमा सुविधा और आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। इससे न केवल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के कार्य को भी मजबूती मिलेगी।

समय पर इलाज से टला बड़ा हादसा

इस पूरे मामले में सबसे राहत की बात यह रही कि शिबू पंडित को समय रहते अस्पताल पहुंचा दिया गया। डॉक्टरों की तत्परता और समय पर मिले उपचार के कारण उनकी जान बच गई। फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है और चिकित्सकीय निगरानी में उनका इलाज जारी है।

हालांकि यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि विषैले सांपों का रेस्क्यू केवल अनुभव से नहीं, बल्कि उचित सुरक्षा संसाधनों के साथ ही सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है। अब देखना होगा कि इस घटना के बाद वन विभाग स्वयंसेवी सर्प मित्रों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस नीति और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराता है या नहीं।