Skip to content

Koderma News : डोमचांच में सीओ के खिलाफ फूटा जनाक्रोश, भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अंचल कार्यालय का घेराव

Megha Sinha

Koderma News : भूमि संबंधी मामलों में अनियमितता, दलालों की सक्रियता और कार्यों में देरी का आरोप; प्रदर्शनकारियों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की, प्रशासन की ओर से खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।

Koderma News : कोडरमा के डोमचांच अंचल कार्यालय के बाहर ग्रामीणों ने सीओ के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर भ्रष्टाचार, भूमि मामलों में अनियमितता और दलालों की सक्रियता के आरोप लगाए। प्रदर्शनकारियों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।

Koderma News : जिले के डोमचांच अंचल कार्यालय के बाहर सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अंचल प्रशासन के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जाहिर की। महिलाओं और पुरुषों सहित विभिन्न गांवों से पहुंचे लोगों ने अंचल कार्यालय का घेराव करते हुए प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि अंचल कार्यालय में भूमि संबंधी मामलों के निष्पादन में भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं, दलालों का प्रभाव बढ़ गया है तथा आम लोगों के कार्यों को जानबूझकर लंबित रखा जाता है।

प्रदर्शन के दौरान लोगों के हाथों में विभिन्न मांगों और नारों वाली तख्तियां दिखाई दीं। इन पर “डोमचांच अंचल में दलाल हटाओ”, “सीओ और कर्मचारी मनमानी बंद करें”, “भ्रष्टाचार बंद करो” जैसे संदेश लिखे गए थे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि आम नागरिकों को अपने वैध कार्यों के लिए भी बार-बार कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है, जबकि कथित रूप से प्रभावशाली लोगों के काम प्राथमिकता के आधार पर किए जाते हैं।

धरना को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यदि अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली में जल्द सुधार नहीं किया गया और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आम जनता लंबे समय से भूमि संबंधी मामलों में परेशान हो रही है, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है।

प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने डोमचांच स्थित बैजनाथ प्रसाद स्नेही कॉलेज के सचिव हिमांशु कुमार और उनके भाई प्रेमांशु कुमार का भी नाम लेते हुए आरोप लगाए। इसके साथ ही नीलकंठ सिंह उर्फ नीलू, अनिल सिंह तथा जी.एस. पब्लिक स्कूल के संस्थापक प्रदीप सिंह सहित कुछ अन्य लोगों के संबंध में भी प्रदर्शनकारियों ने अंचल पदाधिकारी के साथ कथित सांठगांठ होने के आरोप लगाए।

प्रदर्शनकारियों का यह भी आरोप था कि कथित मिलीभगत के कारण कई भूमि मामलों में नियमों की अनदेखी की गई तथा कुछ लोगों के नाम पर जमीन दर्ज कराई गई। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में प्रदर्शनकारियों द्वारा सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक दस्तावेज या न्यायिक निष्कर्ष प्रस्तुत नहीं किया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया भी समाचार लिखे जाने तक सामने नहीं आई थी।

धरना में शामिल लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। उनका कहना था कि यदि जांच में किसी भी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन को और उग्र करने के लिए बाध्य होंगे।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों में कार्रवाई नहीं की गई तो डोमचांच अंचल पदाधिकारी रविंद्र पांडे सहित जिन लोगों के खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं, उनके विरोध में व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलाकर अधिक लोगों को आंदोलन से जोड़ा जाएगा।

धरना-प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन की ओर से निगरानी रखी गई। पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं बल्कि अपनी समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाना और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करना है।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि अंचल कार्यालय में भूमि संबंधी सभी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाया जाए, दलालों की कथित सक्रियता पर रोक लगाने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू की जाए तथा आम लोगों के कार्यों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना था कि यदि व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी तो आम नागरिकों का प्रशासन पर विश्वास भी मजबूत होगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि भूमि विवाद और राजस्व संबंधी मामलों का सीधा प्रभाव आम लोगों के जीवन पर पड़ता है। ऐसे में यदि इन मामलों के निष्पादन में देरी या अनियमितता होती है, तो लोगों को आर्थिक और सामाजिक दोनों प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी कारण इस मुद्दे को लेकर ग्रामीणों में लंबे समय से असंतोष बना हुआ था, जो सोमवार को धरना-प्रदर्शन के रूप में सामने आया।

समाचार लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से इस प्रदर्शन और लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। वहीं, जिन व्यक्तियों के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान आरोप लगाए गए, उनकी प्रतिक्रिया भी प्राप्त नहीं हो सकी। प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर समाचार को अद्यतन किया जाएगा।