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Koderma News : जे जे कॉलेज में 10 अगस्त से चल रहे अनिश्चितकालीन धरना-तालाबंदी,वार्ता के बाद समाप्त

Megha Sinha

Koderma News : 10 दिनों से चल रहा अनिश्चितकालीन धरना और तालाबंदी वार्ता के बाद खत्म, छात्रों की मांग वीबीयू से संबद्धता बरकरार रखने की

Koderma News : कोडरमा के झुमरीतिलैया स्थित जेजे कॉलेज की वीबीयू से संबद्धता हटाकर सर जेसी बोस विश्वविद्यालय से जोड़ने के विरोध में चल रहा आंदोलन समाप्त हो गया। पिछड़ा आयोग अध्यक्ष जानकी प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री से वार्ता कराने का भरोसा दिया।

कोडरमा जिले के ऐतिहासिक जेजे कॉलेज को विनोबा भावे विश्वविद्यालय (VBU) से हटाकर गिरिडीह स्थित सर जेसी बोस विश्वविद्यालय से जोड़ने के विरोध में पिछले 10 अगस्त से चल रहा अनिश्चितकालीन धरना और तालाबंदी आखिरकार समाप्त हो गई। यह फैसला झारखंड राज्य पिछड़ा आयोग के अध्यक्ष जानकी प्रसाद यादव की पहल पर हुई वार्ता के बाद लिया गया।

जेजे कॉलेज बचाओ संघर्ष समिति ने छात्रहित को सर्वोपरि बताते हुए आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की। समिति का कहना है कि सरकार की ओर से मुख्यमंत्री तक उनकी मांगें पहुंचाने और प्रतिनिधिमंडल की वार्ता कराने का आश्वासन मिलने के बाद यह निर्णय लिया गया है।

झारखंड सरकार द्वारा जिले के डिग्री कॉलेजों की संबद्धता में बदलाव करते हुए जेजे कॉलेज समेत कई कॉलेजों को विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग से हटाकर सर जेसी बोस विश्वविद्यालय, गिरिडीह से जोड़ने का निर्णय लिया गया था।

इस फैसले का छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों ने विरोध किया। उनका तर्क है कि कोडरमा के विद्यार्थियों के लिए हजारीबाग की तुलना में गिरिडीह तक शैक्षणिक कार्यों के लिए बार-बार जाना अधिक कठिन और समय लेने वाला होगा। परीक्षा, प्रमाणपत्र, नामांकन तथा प्रशासनिक कार्यों में भी छात्रों को अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ सकती है।

इसी मांग को लेकर जेजे कॉलेज बचाओ संघर्ष समिति ने 10 अगस्त से कॉलेज परिसर में अनिश्चितकालीन धरना और तालाबंदी शुरू की थी।

वार्ता के दौरान झारखंड राज्य पिछड़ा आयोग के अध्यक्ष जानकी प्रसाद यादव ने आंदोलनकारियों की बात गंभीरता से सुनी और कहा कि संभवतः संबद्धता बदलने के समय कॉलेज की भौगोलिक स्थिति तथा छात्रों की सुविधा का समुचित आकलन नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि कोडरमा जिले के हजारों विद्यार्थियों के हित को देखते हुए जेजे कॉलेज को विनोबा भावे विश्वविद्यालय से जुड़े रहने देना अधिक व्यावहारिक और छात्रहितकारी निर्णय होगा।

यादव ने आश्वस्त किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन छात्रों के मुद्दों के प्रति संवेदनशील हैं और संघर्ष समिति की मांगों को सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही शीघ्र ही एक प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री से मुलाकात कराई जाएगी।

वार्ता के दौरान जानकी प्रसाद यादव ने जेजे कॉलेज से अपने व्यक्तिगत संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनकी शिक्षा भी इसी कॉलेज से हुई है और छात्र जीवन में वे छात्रसंघ के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

उन्होंने कहा कि जेजे कॉलेज केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं बल्कि कोडरमा की शैक्षणिक पहचान है। इसलिए इसके भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि संभव हो तो जेजे कॉलेज को ऑटोनोमस कॉलेज का दर्जा देने अथवा भविष्य में इसे विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने पर भी सरकार विचार कर सकती है।

जेजे कॉलेज बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष महेश भारती और सचिव देवेन्द्र कुमार ने संयुक्त रूप से कहा कि आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए किया गया था।

उन्होंने बताया कि पिछड़ा आयोग के अध्यक्ष जानकी प्रसाद यादव तथा जेएमएम जिलाध्यक्ष वीरेंद्र पांडेय ने आंदोलनकारियों से संवाद स्थापित कर उनकी मांगों को जायज माना। दोनों नेताओं ने मुख्यमंत्री से प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात सुनिश्चित कराने की पहल की है, जो सकारात्मक कदम है।

समिति ने कहा कि जब सरकार संवाद के लिए आगे आई है, तब छात्रहित में आंदोलन समाप्त करना उचित निर्णय है। हालांकि यदि भविष्य में मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है तो आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।

वार्ता के बाद संघर्ष समिति ने अपना विस्तृत मांग पत्र जानकी प्रसाद यादव और वीरेंद्र पांडेय को सौंपा। इसमें प्रमुख मांगें शामिल हैं:

  • जेजे कॉलेज की संबद्धता विनोबा भावे विश्वविद्यालय से यथावत रखी जाए।
  • छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भौगोलिक आधार पर निर्णय लिया जाए।
  • जेजे कॉलेज को स्वायत्त (ऑटोनोमस) कॉलेज का दर्जा देने पर विचार किया जाए।
  • दीर्घकालीन योजना के तहत कॉलेज को विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने की संभावना तलाश की जाए।
  • मुख्यमंत्री से शीघ्र प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात कराई जाए।

समिति ने उम्मीद जताई कि सरकार छात्रहित में सकारात्मक निर्णय लेगी।

आंदोलन समाप्त होने के बाद कॉलेज परिसर का माहौल सामान्य हो गया। धरना स्थल पर मौजूद छात्रों ने कहा कि उनका उद्देश्य पढ़ाई बाधित करना नहीं बल्कि कॉलेज के भविष्य को सुरक्षित रखना था।

छात्राओं का कहना है कि यदि संबद्धता गिरिडीह चली जाती है तो उन्हें परीक्षा एवं दस्तावेज संबंधी कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे आर्थिक और समय दोनों का नुकसान होगा। इसलिए वे चाहते हैं कि सरकार स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर फैसला ले।

जेजे कॉलेज कोडरमा जिले का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित डिग्री कॉलेज माना जाता है। वर्षों से यह विनोबा भावे विश्वविद्यालय से संबद्ध रहा है और जिले के हजारों विद्यार्थी यहीं से उच्च शिक्षा प्राप्त करते हैं।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यह केवल प्रशासनिक बदलाव का मामला नहीं बल्कि कोडरमा की शैक्षणिक पहचान और क्षेत्रीय स्वाभिमान से भी जुड़ा विषय है। यही कारण है कि आंदोलन को छात्रों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों और नागरिकों का भी समर्थन मिला।

अब सभी की नजर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ प्रस्तावित प्रतिनिधिमंडल की बैठक पर टिकी है, जहां इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय की दिशा तय हो सकती है।

बैठक एवं आंदोलन समापन के दौरान राम रतन अवध्या, सईद नसीम, नीरज सिंह, सुजीत नायक, तौफीक हुसैन, मोहम्मद सुभान, अनु वर्मा, अंशु कुमारी, प्रिया शर्मा, रजनी कुमारी, पवन यादव, यूसुफ रजा सहित दर्जनों छात्र-छात्राएं और संघर्ष समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

जेजे कॉलेज बचाओ आंदोलन का शांतिपूर्ण समापन इस बात का संकेत है कि संवाद लोकतांत्रिक समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम है। अब मुख्यमंत्री स्तर पर होने वाली वार्ता से यह स्पष्ट होगा कि कोडरमा के हजारों विद्यार्थियों की वर्षों पुरानी शैक्षणिक व्यवस्था बरकरार रहती है या सरकार कोई नया विकल्प सामने लाती है। फिलहाल छात्रों ने आंदोलन स्थगित कर सरकार को भरोसे का अवसर दिया है।