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Koderma POCSO Case
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Koderma POCSO Case में बड़ा फैसला: नाबालिग के अपहरण, तस्करी और दुष्कर्म के आरोपी को 20 साल की सजा

Megha Sinha
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Koderma POCSO Case : अदालत ने दोषी को सुनाई सख्त सजा, पीड़िता को मुआवजा देने का आदेश; मानव तस्करी गिरोह की जांच जारी

Koderma POCSO Case : झारखंड के कोडरमा में नाबालिग के अपहरण, तस्करी और दुष्कर्म मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी को 20 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला न्याय की दिशा में अहम माना जा रहा है।
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Koderma POCSO Case : झारखंड के कोडरमा जिले से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसमें नाबालिग के अपहरण, मानव तस्करी और दुष्कर्म के मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाते हुए आरोपी को 20 साल की सश्रम कारावास की सजा दी है। यह फैसला समाज में अपराधियों के खिलाफ कड़ा संदेश देने वाला माना जा रहा है।

कोडरमा के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम सह विशेष पोक्सो न्यायालय के न्यायाधीश गुलाम हैदर की अदालत ने पोक्सो केस नंबर 15/2025 की सुनवाई करते हुए आरोपी बनवारी लाल को दोषी करार दिया। अदालत ने आरोपी को पोक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत 20-20 साल की सजा सुनाई, जो साथ-साथ चलेगी। इसके अलावा 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने की स्थिति में अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

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अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 87 के तहत 7 साल और बाल विवाह अधिनियम के तहत 2 साल की सजा भी सुनाई है। हालांकि, सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, जिससे कुल सजा अवधि 20 साल ही रहेगी।

यह मामला वर्ष 2025 का है, जब तिलैया थाना क्षेत्र में पीड़िता की मां ने कांड संख्या 18/2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जानकारी के अनुसार, पीड़िता अपनी मां के साथ बाजार गई थी, जहां से वह अचानक लापता हो गई। काफी खोजबीन के बावजूद उसका कोई सुराग नहीं मिला।

बाद में पुलिस ने तकनीकी जांच और सुरागों के आधार पर पीड़िता को राजस्थान से बरामद किया। पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि उसे जबरन अगवा कर नशीला पदार्थ सुंघाकर कार में बैठाया गया और राजस्थान ले जाया गया। वहां उसे एक कमरे में बंद रखा गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया गया और जबरन शादी कराई गई।

मामले की सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक प्रवीण कुमार सिंह ने सभी गवाहों और साक्ष्यों को अदालत के समक्ष मजबूती से प्रस्तुत किया और आरोपी के लिए कड़ी से कड़ी सजा की मांग की। वहीं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रकाश राम ने अपनी दलीलें रखीं।

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सभी तथ्यों, गवाहों और साक्ष्यों का गहन अध्ययन करने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सख्त सजा सुनाई। साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जुर्माने की राशि पीड़िता को दी जाए और पीड़ित मुआवजा योजना के तहत अतिरिक्त सहायता भी सुनिश्चित की जाए।

इस मामले में मानव तस्करी से जुड़े अन्य संभावित आरोपियों की तलाश और जांच अभी भी जारी है। पुलिस इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

फिलहाल, इस मामले में आया यह फैसला न्याय व्यवस्था में विश्वास को मजबूत करने वाला और अपराधियों के खिलाफ कड़ा संदेश देने वाला माना जा रहा है।