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दुमका दौरे पर जाने की तैयारी में बाबूलाल, उपचुनाव में झामुमो को शिकस्त देने पर बनायेगे रणनीति

Shah Ahmad

झारखंड के 2019 विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा में घर वापसी करने वाले राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी तकरीबन 17 सालो के बाद भाजपा के लिए चुनावी मैदान में उतरेगे। दुमका सीट जीतने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उसे छोड़ दिया था जिस वजह से बिहार विधानसभा चुनाव के साथ-साथ राज्य के 2 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं जिनमें दुमका व बेरमो शामिल है। दुमका की सीट झामुमो के खाते में गई थी तो वहीं बेरमो पर कांग्रेस ने अपना कब्जा जमाया था लेकिन दुमका सीट को हेमंत सोरेन द्वारा छोड़ने तथा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व बेरमो से विधायक चुने गए राजेंद्र प्रसाद के निधन के बाद दोनों सीटों पर उपचुनाव होने हैं ऐसे में भाजपा दोनों सीटों को जीतने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती हैं।

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बुधवार की शाम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने तीन दिवसीय दुमका दौरे से रांची वापस लौटे हैं दुमका दौरे के दौरान उपचुनाव को साधने के लिए सत्ताधारी दल व मुख्यमंत्री ने दुमका विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत कई योजनाओं का शुभारंभ उद्घाटन किया, तो दूसरी तरफ भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी भी दुमका सीट जीतने के लिए कमर कस चुके हैं। दुमका सीट को भाजपा के खाते में लाने के लिए मरांडी दुमका दौरे पर जाने वाले हैं मरांडी का दुमका दौरा 25 सितंबर से लेकर 29 सितंबर तक होने की संभावना है। दुमका दौरे से पूर्व मरांडी ने बुधवार को बोकारो का भी दौरा किया जहां उन्होंने बेरमो सीट जीतने के लिए भी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर रणनीति बनाई है। बोकारो में प्रेस वार्ता के दौरान मरांडी ने साफ किया कि वह दुमका उपचुनाव लड़ने के मूड में नहीं है लेकिन झामुमो को भी जीतने नहीं देंगे यह तय है मरांडी ने दुमका उपचुनाव के लिए झामुमो की तरफ से संभावित उम्मीदवार बसंत सोरेन का बिना नाम लिए करारा प्रहार किया है उन्होंने बसंत सोरेन के बारे में कहा कि झामुमो का प्रत्याशी एक लेरू है जिसे भाजपा का सामान्य कार्यकर्ता भी हरा सकता है इस लिहाज से दुमका सीट एक बार फिर भाजपा जीतेगी।

अपने दुमका दौरे के दौरान बाबूलाल मरांडी दुमका विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पड़ने वाले पंचायतों का दौरा करेंगे। साथ ही विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत जन समस्याओं को जानने का भी प्रयास करेंगे। भाजपा की दृष्टिकोण से मरांडी का दुमका द्वारा काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि बाबूलाल मरांडी के रूप में एक आदिवासी चेहरा दूसरे आदिवासी चेहरे के विरोध खड़ा रहेगा और चुनावी रणनीतियों पर काम करेगा इस लिहाज से दुमका का उपचुनाव सत्ता पक्ष और विपक्ष के लिए नाक की लड़ाई साबित होती दिख रही है। हालांकि 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली करारी शिकस्त के बाद दुमका सीट जीतकर भाजपा के समय में मरांडी एक बार फिर से उत्साह और जान सूखने की रणनीति पर काम कर रहे हैं तो वहीं झामुमो की तरफ से दुमका सीट जीतकर एक बार फिर भाजपा को औंधे मुंह गिराने की तैयारी की जा रही है।

2019 के ही लोकसभा चुनाव में भाजपा के सुनील सोरेन द्वारा झामुमो अध्यक्ष शिबू सोरेन को मिली हार का बदला विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी व पूर्व मंत्री लुईस मरांडी को हराकर झामुमो ने वसूल किया है। दुमका सीट दोनों पार्टियों के लिए नाक की लड़ाई साबित होने वाली है क्योंकि विधानसभा चुनाव में हार का सामना करने वाली भाजपा उपचुनाव में झामुमो के प्रत्याशी को हराकर सत्ता में काबीज हेमंत सोरेन को कड़ा संदेश देना चाहती है। तो वही झामुमो इस सीट को दोबारा जीत कर अपने प्रभाव को कायम रखने की जुगाड़ में लग गई है।

देखना दिलचस्प होगा कि आखिर दुमका विधानसभा उपचुनाव में किसकी जीत और किसकी हार होती है लेकिन यह भी तय माना जा रहा है की इस सीट पर जिस भी पार्टी की जीत होगी उसके ऊर्जा में और संचार होने की संभावना है।

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