babulal and deepak prakash

कोल ब्लॉक नीलामी के खिलाफ SC जाने पर बाबूलाल ने राज्य सरकार को बताया समझ का फेर

News Desk
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केंद्र सरकार के द्वारा देश भर के 41 कोल ब्लॉक को आत्मनिर्भर भारत मिशन के पहले चरण के तहत निजी हाथो में सौपने के खिलाफ राज्य की हेमंत सरकार ने ने इसका कड़ा विरोध किया है. मामला सिर्फ विरोध तक सिमित नहीं रहा है बल्कि मामला सुप्रीम कोर्ट भी जा चूका है.

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41 कोल ब्लॉक्स की नीलामी में झारखंड के भी 16 कोल ब्लॉक्स शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने कॉमर्शियल माइनिंग को समय की मांग ठहराते हुए कहा कि इससे भारत कोरोना से भी लड़ेगा और आगे भी बढ़ेगा। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत कॉमर्शियल माइनिंग के लिए कोल ब्लॉक की नीलामी गुरुवार (18 जून, 2020) को शुरू हुई है. झारखंड सरकार ने केंद्र सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। कोल ब्लॉक नीलामी पर झारखंड सरकार को आपत्ति है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि इसे लेकर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। केंद्र सरकार का यह बड़ा नीतिगत निर्णय है। इसमें राज्य सरकार को भरोसे में लेना जरूरी है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि खनन के कारण विस्थापन की समस्या बरकरार और उलझी हुई है। कोल ब्लॉक की नीलामी से पहले झारखंड में सामाजिक-आर्थिक सर्वे जरूरी था। इससे पता चलता कि पूर्व में हुए खनन से हमें क्या लाभ मिला अथवा हानि हुई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने हड़बड़ी में कोल ब्लॉक की नीलामी करने का निर्णय किया है। झारखंड सरकार ने केंद्र से खनन के विषय पर जल्दबाजी न करने का आग्रह किया था।

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राज्य सरकार के द्वारा सुप्रीम कोर्ट का रुख करने के बाद भाजपा हमलावर हो गयी है. सोमवार को झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सह नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश और भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने प्रेस वार्ता कर राज्य सरकार पर कड़ा प्रहार किया है. प्रेस वार्ता में बाबूलाल ने कहा की राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट तक क्यों गयी है ये समझ से परे है. “राज्य सरकार तर्क दे रही की इससे खनन के कारण विस्थापन की समस्या बरकरार और उलझी हुई है. और इससे पता चलेगा की पूर्व में हुए खनन से हमें क्या लाभ मिला अथवा हानि हुई।” इस पर बाबूलाल ने बिना नाम लिए कहा है की जिस वक्त शिबू सोरेन कोयला मंत्री थे उससे वक्त ये सब बाते क्यों याद नहीं आई थी.

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आगे बाबूलाल ने कहा की विस्थापन का तर्क राज्य सरकार दे रही है लेकिन लगता है राज्य सरकार को ये नहीं पता की विस्थापन की समस्या का समाधान करना राज्य की जिम्मेदारी होती है न की केंद्र सरकार की. 2004-14 के यूपीए कार्यकाल को याद करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा की ये वही लोग है जिनके शासनकाल में लूट की कहानियाँ मशहूर है. राज्य सरकार मनचाहा लूटने की कोशिश कर रही है लेकिन केंद्र में जब तक मोदी जी की सरकार है ऐसा होने नहीं दिया जायेगा।

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विस्थापन पर बोलते हुए बाबूलाल ने कहा अगर सच में राज्य सरकार विस्थापन को लेकर गंभीर है तो सदन में कानून लाए हमारी पार्टी (BJP) उनका समर्थन करेगी। लेकिन अगर ये मात्र एक ढोंग है तो इसे हम कामयाब नहीं होने देंगे। मोदी जी की सरकार ने आत्मनिर्भर भारत की कल्पना की है और देश उस ओर आगे बढ़ रहा है लेकिन राज्य सरकार अड़ंगा डालने का काम कर रही है. जबकि उन्हें सहयोग करना चाहिए था.

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