Birsa Munda Airport International : भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट, सीआईक्यू सुविधाओं के लिए स्थान चिन्हित, मंजूरी मिलने के बाद खाड़ी देशों के लिए रांची से सीधी उड़ानों की शुरुआत की तैयारी।
Birsa Munda Airport International : रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय दर्जा दिलाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद सबसे पहले खाड़ी देशों के लिए सीधी उड़ानें शुरू करने की योजना है, जिससे झारखंड के यात्रियों, उद्योग और पर्यटन को बड़ा लाभ मिलेगा।
झारखंड की राजधानी रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने एयरपोर्ट की आधारभूत संरचना, सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय परिचालन की संभावनाओं का विस्तृत आकलन कर अपनी रिपोर्ट नागरिक उड्डयन मंत्रालय को भेज दी है। अब इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार को लेना है।
यदि सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी होती हैं तो आने वाले समय में रांची उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो जाएगा, जहां से घरेलू उड़ानों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन भी संभव होगा। इससे झारखंड के लाखों यात्रियों को विदेश यात्रा के लिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता या हैदराबाद जैसे शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
सबसे पहले खाड़ी देशों के लिए शुरू हो सकती हैं सीधी उड़ानें
एयरपोर्ट प्रबंधन के अनुसार अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की शुरुआत सबसे पहले खाड़ी देशों के लिए किए जाने की संभावना है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि झारखंड से बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए दुबई, कतर, ओमान, बहरीन, सऊदी अरब, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में कार्यरत हैं।
वर्तमान में इन यात्रियों को रांची से पहले दिल्ली, मुंबई, कोलकाता या हैदराबाद जाना पड़ता है और वहां से अंतरराष्ट्रीय उड़ान पकड़नी होती है। यदि रांची से सीधी सेवा शुरू होती है तो यात्रियों के समय और खर्च दोनों में उल्लेखनीय कमी आएगी।
मंत्रालय को भेजी गई विस्तृत रिपोर्ट
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में एयरपोर्ट की मौजूदा क्षमता, रनवे, सुरक्षा प्रणाली, टर्मिनल सुविधाएं, यात्री क्षमता और भविष्य में अंतरराष्ट्रीय परिचालन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं का विस्तृत उल्लेख किया गया है।
अब नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस रिपोर्ट का अध्ययन करेगा और आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
सीआईक्यू सुविधा के लिए स्थान पहले ही चिन्हित
किसी भी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए कस्टम, इमिग्रेशन और क्वारंटीन (CIQ) व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण होती है।
एयरपोर्ट प्रशासन ने इन सभी विभागों के कार्यालय स्थापित करने के लिए आवश्यक स्थान पहले ही चिन्हित कर लिया है। केंद्र सरकार की मंजूरी मिलते ही संबंधित विभागों की तैनाती की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इसके बाद विदेश जाने वाले यात्रियों को पासपोर्ट जांच, इमिग्रेशन, कस्टम क्लियरेंस और अन्य सभी औपचारिकताएं रांची एयरपोर्ट पर ही पूरी करने की सुविधा मिल सकेगी।
आधुनिक सुविधाओं से लैस है नया टर्मिनल
बिरसा मुंडा एयरपोर्ट का नया टर्मिनल भवन पहले से ही आधुनिक सुविधाओं के अनुरूप विकसित किया गया है।
करीब 19 हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल में फैले इस टर्मिनल की क्षमता एक समय में लगभग 500 यात्रियों को संभालने की है। यहां पर्याप्त चेक-इन काउंटर, विस्तृत आगमन और प्रस्थान क्षेत्र, आधुनिक सुरक्षा प्रणाली तथा भविष्य के विस्तार की भी व्यवस्था की गई है।
एयरपोर्ट को पहले ही आईएसओ प्रमाणन मिल चुका है, जो इसकी गुणवत्ता और संचालन मानकों को दर्शाता है।
सुरक्षा व्यवस्था भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप
रांची एयरपोर्ट पर आधुनिक एक्स-रे बैगेज स्कैनर, हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी निगरानी प्रणाली, अत्याधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम और आधुनिक एयर ट्रैफिक कंट्रोल जैसी सुविधाएं पहले से मौजूद हैं।
इसके अलावा रनवे और एप्रन की क्षमता भी वर्तमान एवं भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त मानी जा रही है।
एयरलाइंस कंपनियों से भी शुरू हुई बातचीत
एयरपोर्ट प्रबंधन ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन को लेकर कई एयरलाइंस कंपनियों से प्रारंभिक स्तर पर संपर्क भी शुरू कर दिया है।
हालांकि किसी भी अंतरराष्ट्रीय रूट के सफल संचालन के लिए एयरलाइंस की व्यावसायिक रुचि, पर्याप्त यात्री संख्या, द्विपक्षीय उड़ान समझौते और राज्य सरकार का सहयोग भी आवश्यक होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खाड़ी देशों के लिए पर्याप्त यात्री उपलब्ध रहे तो यह सेवा व्यावसायिक रूप से भी सफल साबित हो सकती है।
विदेशी पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि
झारखंड में विदेशी पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। राज्य गठन के शुरुआती वर्षों में जहां सालाना केवल 172 विदेशी पर्यटक आते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर तीन लाख से अधिक हो चुकी है।
पिछले वर्ष राज्य में लगभग 3.31 लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे। इससे यह संकेत मिलता है कि राज्य में पर्यटन की संभावनाएं तेजी से विकसित हो रही हैं। यदि रांची से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होती हैं तो पर्यटन क्षेत्र को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
पासपोर्ट बनने की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी
क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2013 से दिसंबर 2025 तक झारखंड में लगभग 10.98 लाख पासपोर्ट जारी किए जा चुके हैं।
कोरोना महामारी के बाद विदेश जाने वालों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।
- वर्ष 2022 : लगभग 1.01 लाख पासपोर्ट जारी
- वर्ष 2023 : लगभग 1.09 लाख पासपोर्ट जारी
- वर्ष 2024 : लगभग 1.12 लाख पासपोर्ट जारी
- वर्ष 2025 : लगभग 1.13 लाख पासपोर्ट जारी
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि विदेश यात्रा करने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है और रांची से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की मांग भी मजबूत होती जा रही है।
रांची से अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू होने के फायदे
रांची से सीधे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की शुरुआत होने पर कई महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे।
- दिल्ली, मुंबई या कोलकाता होकर विदेश जाने की मजबूरी समाप्त होगी।
- यात्रियों का 4 से 8 घंटे तक का समय बच सकता है।
- यात्रा खर्च में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
- खाड़ी देशों में कार्यरत झारखंड के प्रवासी श्रमिकों को बड़ी राहत मिलेगी।
- कारोबारियों, छात्रों और मेडिकल उपचार के लिए विदेश जाने वाले यात्रियों को सुविधा मिलेगी।
- राज्य में निवेश, उद्योग और पर्यटन को नई गति मिलने की संभावना बढ़ेगी।
- झारखंड की अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत होगी।
अभी किन मंजूरियों का इंतजार
हालांकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की शुरुआत से पहले कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- केंद्र सरकार से अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का अंतिम दर्जा।
- कस्टम, इमिग्रेशन और क्वारंटीन (CIQ) की स्थापना।
- एयरलाइंस कंपनियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय रूट पर उड़ानों की घोषणा।
- संबंधित देशों के साथ स्लॉट और उड़ान अनुमति।
- पर्याप्त यात्री मांग और व्यावसायिक व्यवहार्यता सुनिश्चित करना।
झारखंड के लिए होगा ऐतिहासिक बदलाव
यदि बिरसा मुंडा एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिल जाता है तो यह केवल रांची ही नहीं बल्कि पूरे झारखंड के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। इससे राज्य के उद्योग, व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी। साथ ही विदेशों में कार्यरत लाखों झारखंडवासियों और उनके परिवारों के लिए यात्रा पहले से कहीं अधिक आसान, सस्ती और सुविधाजनक हो जाएगी।
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