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पारा शिक्षकों के मामले पर केंद्र और झारखंड आमने-सामने, केंद्र नहीं माना तो राज्य में नई शिक्षा नीति नहीं होगी लागू!

झारखंड में पारा शिक्षकों का मुद्दा लंबे समय से गर्म रहा है. इस बीच झारखंड सरकार और केंद्र सरकार के बीच पारा शिक्षकों के मामले को लेकर आमने-सामने होने की खबर है.

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केंद्र सरकार के द्वारा नई शिक्षा नीति लाने के बाद राज्य के पारा शिक्षकों का पद स्वत: समाप्त हो जाएगा. राज्य सरकार पारा शिक्षकों के पद को समाप्त नहीं करना चाहती है. जिस वजह से राज्य सरकार केंद्र पर दबाव बनाना शुरू कर चुकी है. दरअसल, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के द्वारा लाए गए नहीं शिक्षा नीति के लागू होने से झारखंड के पारा शिक्षकों का पद स्वत: समाप्त हो जाएगा. सभी सरकारी और एक समान वेतनमान पाने वाले शिक्षक हो जाएंगे. जिसे देखते हुए राज्य सरकार ने पारा शिक्षकों के वेतनमान पर आने वाले पूरे खर्च को केंद्र सरकार से मांगा है.

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मौजूदा समय में पारा शिक्षकों के मानदेय पर 60 फ़ीसदी केंद्र और 40 फ़ीसदी राज्य सरकार खर्च करती है.  नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा देशभर के सभी राज्यों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग  की बैठक में नई शिक्षा नीति लागू करने की बात कही गई जिसमें झारखंड  सरकार ने अपनी मांग केंद्र सरकार के सामने रखी है.

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झारखंड सरकार की तरफ से पारा शिक्षकों के लिए की गई इस मांग के बाद केंद्र सरकार को निर्णय लेना है. यदि राज्य सरकार की मांग को केंद्र सरकार  मान लेती है तो राज्य में नई शिक्षा नीति लागू कर पाने में आसानी होगी. लेकिन यदि केंद्र पारा शिक्षकों को पूरा वेतन देने पर राजी नहीं होती है तो यह मामला फंस जाएगा. राज्य सरकार का कहना है कि नहीं शिक्षा नीति को लागू करने के लिए उसे करीब 60,000 शिक्षकों की बहाली करनी पड़ेगी जिनके वेतनमान पर सालाना करीब ₹800 खर्च होंगे. इसलिए इतनी बड़ी रकम अकेले वहन करना राज्य सरकार के वश में नहीं है. पहले से ही उसके पास टेट पास पारा शिक्षकों को वेतनमान देने का प्रस्ताव विचाराधीन है.

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