
लॉकडाउन के एक महीने बाद मजदूर दिवस के दिन प्रवासी मजदूरों और छात्रों को अपने राज्य पहुँचाने के लिए “श्रमिक स्पेशल” केंद्र सरकार ने चलाने की घोषणा की है. लॉक डाउन के कारण दूसरे राज्यों में फंसे लोगो को उनके अपने राज्य पहुँचाया जायेगा।
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शुक्रवार को जारी आदेश के अनुसार रेलवे द्वारा चलाया जाने वाला “श्रमिक स्पेशल” ट्रेन का किराया रेलवे मंत्रालय राज्य सरकार से वसूलेगा। किराया में स्लीपर क्लास के टिकट की कीमत, 30 रुपये का सुपरफास्ट चार्ज और प्रति यात्री भोजन और पानी के लिए 20 रुपये शामिल होंगे।
यह वाक़ई दुःखद है।
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) May 2, 2020
केंद्र सरकार को इस फ़ैसले पर पुनःविचार करना चाहिए। आपदा की इस घड़ी में अपने घर वापस लौट रहे श्रमिक साथियों के साथ यह अन्याय है। https://t.co/v7Q1kToSYV
लॉकडाउन के दौरान चलने वाली पहली ट्रेन झारखण्ड के लिए चली जो 1200 मजदूरों को हैदराबाद से लेकर शुक्रवार की देर रात तक़रीबन 11 बजे हटिया रेलवे स्टेशन पहुंचा यहां उनका गुलाब का फूल और खाने का एक पैकेट देकर किया गया. रेलवे मंत्रालय ने ये साफ़ किया है की अपने राज्य जा रहे श्रमिकों को रेलवे से कुछ भी खरीदने की जरुरत नहीं है, वो जिस राज्य के है उस राज्य सरकार के द्वारा उनके खाने-पिने और जाने का किराया दिया जायेगा।
25 मार्च को लॉकडाउन लागू होने के बाद से हजारों प्रवासी मजदूर देश भर के स्थानों पर फंसे हुए थे, कई लोग सैकड़ों किलोमीटर दूर घर जाने के लिए पैदल ही चलने का प्रयास भी कर रहे थे। शुक्रवार को गृह मंत्रालय ने रेलवे को प्रवासियों मजदूरों और देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे लोगों के लिए विशेष ट्रेनें चलाने की अनुमति दी।
राजस्थान, झारखंड, बिहार, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और तेलंगाना जैसे राज्यों ने प्रवासी श्रमिकों को उनके घरेलू राज्यों में वापसी करने के लिए विशेष ट्रेन चलाने का अनुरोध किया था.
रेलवे के प्रवक्ता ने कहा की जो ट्रेन जिस राज्य जाएगी उसमे कौन जायेगा इसे तय करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है. क्यूंकि रेलवे सिर्फ राज्यों के निर्देश पर उनके लोगो को पहुँचाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन चला रही है. यदि कोई ट्रेन की तलाश में रेलवे स्टेशन आता है तो व्यर्थ माना जायेगा क्योंकी रेलवे की तरफ से कोई टिकट जारी नहीं किया जा रहा है. राज्यों द्वारा चिन्हित लोगो को ही ट्रेनों में सफर करने दिया जा रहा है.
