Skip to content

Dhanbad ED Raid : अवैध कोयला खनन और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 25 ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी, कई बड़े कारोबारी जांच के दायरे में

Megha Sinha

Dhanbad ED Raid : धनबाद, झरिया, केंदुआ और लोयाबाद समेत कई इलाकों में ईडी की बड़ी कार्रवाई, डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक खातों और बेनामी संपत्तियों के दस्तावेजों की गहन जांच जारी।

Dhanbad ED Raid : झारखंड के कोयला नगरी धनबाद में मंगलवार की सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अवैध कोयला खनन, परिवहन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े बड़े नेटवर्क के खिलाफ एक साथ व्यापक कार्रवाई शुरू कर दी। केंद्रीय सुरक्षा बलों की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ईडी की लगभग 25 अलग-अलग टीमों ने शहर और आसपास के क्षेत्रों में एक साथ दबिश देकर कई प्रमुख कोयला कारोबारियों, उनके सहयोगियों और रिश्तेदारों के आवास एवं व्यावसायिक परिसरों की तलाशी शुरू की। सुबह से जारी इस कार्रवाई ने पूरे कोयलांचल में हलचल मचा दी है।

जानकारी के अनुसार ईडी की टीमें आवासीय परिसरों के अलावा कार्यालयों, गोदामों और अन्य व्यावसायिक ठिकानों पर मौजूद दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड, कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेजों और कथित बेनामी संपत्तियों के रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही हैं। जांच एजेंसी का उद्देश्य अवैध कोयला कारोबार से अर्जित धन के स्रोत और उसके निवेश के नेटवर्क का पता लगाना है।

इन प्रमुख कारोबारियों के ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस बड़ी कार्रवाई के केंद्र में धनबाद के कई चर्चित कोयला कारोबारी और उनसे जुड़े लोग हैं। इनमें एलबी सिंह, अनिल गोयल, गणेश यादव, पप्पू मंडल, अनूप चौहान, हरेंद्र चौहान तथा पूर्व विधानसभा प्रत्याशी रोहित यादव एवं उनके सहयोगियों के ठिकाने शामिल बताए जा रहे हैं।

ईडी की टीमें झरिया में यादव बंधुओं, केंदुआ में मंडल बंधुओं तथा लोयाबाद में चौहान ब्रदर्स से जुड़े परिसरों में भी दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। इसके अलावा मेमको मोड़ स्थित नालंदा कॉटेज में एक प्रमुख कारोबारी के आवास पर भी छापेमारी जारी है। शहर के विभिन्न हिस्सों में एक साथ चल रही कार्रवाई के कारण पूरे दिन लोगों के बीच इस मामले की चर्चा होती रही।

केंद्रीय सुरक्षा बलों की निगरानी में चला अभियान

ईडी की कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती गई। केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों के साथ स्थानीय पुलिस भी हर संवेदनशील स्थान पर तैनात रही। अधिकारियों ने सभी परिसरों में प्रवेश से पहले सुरक्षा घेरा बनाया, ताकि किसी प्रकार की बाधा या अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।

बताया जा रहा है कि कई स्थानों पर ईडी अधिकारियों ने घंटों तक दस्तावेजों की जांच की। टीमों ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से डेटा भी एकत्र किया, ताकि वित्तीय लेन-देन और कथित मनी लॉन्ड्रिंग के नेटवर्क की जांच की जा सके।

एक ठिकाने पर दरवाजा नहीं खुलने पर सीढ़ी से पहुंचे अधिकारी

छापेमारी के दौरान एक कारोबारी के रिश्तेदार के आवास पर ईडी अधिकारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। जानकारी के अनुसार काफी देर तक दरवाजा नहीं खोला गया, जिसके बाद अधिकारियों ने सीढ़ी का सहारा लेकर परिसर के भीतर प्रवेश किया और तलाशी अभियान शुरू किया। इस घटना के बाद आसपास के इलाके में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई।

हालांकि सुरक्षा बलों की मौजूदगी के कारण पूरे अभियान को शांतिपूर्ण ढंग से संचालित किया गया और किसी प्रकार की अव्यवस्था की सूचना नहीं मिली।

डिजिटल रिकॉर्ड और बैंक ट्रांजेक्शन पर विशेष फोकस

सूत्रों के अनुसार इस बार ईडी की जांच केवल नकदी या संपत्ति तक सीमित नहीं है। एजेंसी डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन, शेल कंपनियों के दस्तावेज, निवेश से जुड़े रिकॉर्ड तथा संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की भी बारीकी से जांच कर रही है।

माना जा रहा है कि जांच के दौरान मिले डिजिटल साक्ष्य अवैध कोयला कारोबार से जुड़े वित्तीय नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग की पूरी श्रृंखला को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसी कारण टीमों ने कई स्थानों से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का भी परीक्षण शुरू किया है।

प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आने की संभावना

जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ईडी का दायरा केवल कारोबारियों तक सीमित नहीं रहेगा। यदि जांच के दौरान ऐसे साक्ष्य सामने आते हैं, जिनसे यह संकेत मिले कि अवैध कारोबार को किसी स्तर पर प्रशासनिक संरक्षण या सहयोग मिला, तो संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।

हालांकि इस संबंध में ईडी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। फिलहाल एजेंसी दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान करने में जुटी हुई है।

पहले भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई

गौरतलब है कि नवंबर 2025 में भी ईडी ने इसी मामले में कई कारोबारियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस कार्रवाई के दौरान लगभग ₹2.20 करोड़ नकद और 150 से अधिक जमीन-जायदाद से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए थे। जांच एजेंसी को उस समय कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड भी मिले थे।

बताया जा रहा है कि उसी कार्रवाई के दौरान प्राप्त इनपुट, बैंक ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद इस बार की कार्रवाई का दायरा और व्यापक किया गया है। एजेंसी का मानना है कि अवैध कोयला कारोबार से जुड़े धन के प्रवाह की पूरी श्रृंखला की जांच अभी बाकी है।

आगे हो सकते हैं कई बड़े खुलासे

ईडी की टीमें सभी ठिकानों पर दस्तावेजों का सत्यापन, डिजिटल डेटा का विश्लेषण और बैंकिंग रिकॉर्ड का मिलान कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद एजेंसी कई लोगों से पूछताछ कर सकती है। यदि जांच में नए साक्ष्य सामने आते हैं तो आने वाले दिनों में और भी कई स्थानों पर कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

फिलहाल पूरे कोयलांचल की नजर इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई पर टिकी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अवैध कोयला कारोबार और कथित मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले में किन-किन लोगों की भूमिका सामने आती है और आगे एजेंसी क्या कानूनी कदम उठाती है।

धनबाद, झरिया, केंदुआ और लोयाबाद समेत कई इलाकों में ईडी की बड़ी कार्रवाई, डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक खातों और बेनामी संपत्तियों के दस्तावेजों की गहन जांच जारी।

धनबाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अवैध कोयला खनन और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 25 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। कई बड़े कोयला कारोबारी और उनके सहयोगी जांच के दायरे में हैं। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

धनबाद: झारखंड के कोयला नगरी धनबाद में मंगलवार की सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अवैध कोयला खनन, परिवहन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े बड़े नेटवर्क के खिलाफ एक साथ व्यापक कार्रवाई शुरू कर दी। केंद्रीय सुरक्षा बलों की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ईडी की लगभग 25 अलग-अलग टीमों ने शहर और आसपास के क्षेत्रों में एक साथ दबिश देकर कई प्रमुख कोयला कारोबारियों, उनके सहयोगियों और रिश्तेदारों के आवास एवं व्यावसायिक परिसरों की तलाशी शुरू की। सुबह से जारी इस कार्रवाई ने पूरे कोयलांचल में हलचल मचा दी है।

जानकारी के अनुसार ईडी की टीमें आवासीय परिसरों के अलावा कार्यालयों, गोदामों और अन्य व्यावसायिक ठिकानों पर मौजूद दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड, कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेजों और कथित बेनामी संपत्तियों के रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही हैं। जांच एजेंसी का उद्देश्य अवैध कोयला कारोबार से अर्जित धन के स्रोत और उसके निवेश के नेटवर्क का पता लगाना है।

इन प्रमुख कारोबारियों के ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस बड़ी कार्रवाई के केंद्र में धनबाद के कई चर्चित कोयला कारोबारी और उनसे जुड़े लोग हैं। इनमें एलबी सिंह, अनिल गोयल, गणेश यादव, पप्पू मंडल, अनूप चौहान, हरेंद्र चौहान तथा पूर्व विधानसभा प्रत्याशी रोहित यादव एवं उनके सहयोगियों के ठिकाने शामिल बताए जा रहे हैं।

ईडी की टीमें झरिया में यादव बंधुओं, केंदुआ में मंडल बंधुओं तथा लोयाबाद में चौहान ब्रदर्स से जुड़े परिसरों में भी दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। इसके अलावा मेमको मोड़ स्थित नालंदा कॉटेज में एक प्रमुख कारोबारी के आवास पर भी छापेमारी जारी है। शहर के विभिन्न हिस्सों में एक साथ चल रही कार्रवाई के कारण पूरे दिन लोगों के बीच इस मामले की चर्चा होती रही।

केंद्रीय सुरक्षा बलों की निगरानी में चला अभियान

ईडी की कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती गई। केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों के साथ स्थानीय पुलिस भी हर संवेदनशील स्थान पर तैनात रही। अधिकारियों ने सभी परिसरों में प्रवेश से पहले सुरक्षा घेरा बनाया, ताकि किसी प्रकार की बाधा या अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।

बताया जा रहा है कि कई स्थानों पर ईडी अधिकारियों ने घंटों तक दस्तावेजों की जांच की। टीमों ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से डेटा भी एकत्र किया, ताकि वित्तीय लेन-देन और कथित मनी लॉन्ड्रिंग के नेटवर्क की जांच की जा सके।

एक ठिकाने पर दरवाजा नहीं खुलने पर सीढ़ी से पहुंचे अधिकारी

छापेमारी के दौरान एक कारोबारी के रिश्तेदार के आवास पर ईडी अधिकारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। जानकारी के अनुसार काफी देर तक दरवाजा नहीं खोला गया, जिसके बाद अधिकारियों ने सीढ़ी का सहारा लेकर परिसर के भीतर प्रवेश किया और तलाशी अभियान शुरू किया। इस घटना के बाद आसपास के इलाके में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई।

हालांकि सुरक्षा बलों की मौजूदगी के कारण पूरे अभियान को शांतिपूर्ण ढंग से संचालित किया गया और किसी प्रकार की अव्यवस्था की सूचना नहीं मिली।

डिजिटल रिकॉर्ड और बैंक ट्रांजेक्शन पर विशेष फोकस

सूत्रों के अनुसार इस बार ईडी की जांच केवल नकदी या संपत्ति तक सीमित नहीं है। एजेंसी डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन, शेल कंपनियों के दस्तावेज, निवेश से जुड़े रिकॉर्ड तथा संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की भी बारीकी से जांच कर रही है।

माना जा रहा है कि जांच के दौरान मिले डिजिटल साक्ष्य अवैध कोयला कारोबार से जुड़े वित्तीय नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग की पूरी श्रृंखला को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसी कारण टीमों ने कई स्थानों से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का भी परीक्षण शुरू किया है।

प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आने की संभावना

जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ईडी का दायरा केवल कारोबारियों तक सीमित नहीं रहेगा। यदि जांच के दौरान ऐसे साक्ष्य सामने आते हैं, जिनसे यह संकेत मिले कि अवैध कारोबार को किसी स्तर पर प्रशासनिक संरक्षण या सहयोग मिला, तो संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।

हालांकि इस संबंध में ईडी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। फिलहाल एजेंसी दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान करने में जुटी हुई है।

पहले भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई

गौरतलब है कि नवंबर 2025 में भी ईडी ने इसी मामले में कई कारोबारियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस कार्रवाई के दौरान लगभग ₹2.20 करोड़ नकद और 150 से अधिक जमीन-जायदाद से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए थे। जांच एजेंसी को उस समय कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड भी मिले थे।

बताया जा रहा है कि उसी कार्रवाई के दौरान प्राप्त इनपुट, बैंक ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद इस बार की कार्रवाई का दायरा और व्यापक किया गया है। एजेंसी का मानना है कि अवैध कोयला कारोबार से जुड़े धन के प्रवाह की पूरी श्रृंखला की जांच अभी बाकी है।

आगे हो सकते हैं कई बड़े खुलासे

ईडी की टीमें सभी ठिकानों पर दस्तावेजों का सत्यापन, डिजिटल डेटा का विश्लेषण और बैंकिंग रिकॉर्ड का मिलान कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद एजेंसी कई लोगों से पूछताछ कर सकती है। यदि जांच में नए साक्ष्य सामने आते हैं तो आने वाले दिनों में और भी कई स्थानों पर कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

फिलहाल पूरे कोयलांचल की नजर इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई पर टिकी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अवैध कोयला कारोबार और कथित मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले में किन-किन लोगों की भूमिका सामने आती है और आगे एजेंसी क्या कानूनी कदम उठाती है।