Dhanbad landslide : जामाडोबा में सड़क किनारे अचानक धंसी जमीन, 24 घंटे बाद भी केवल बैरिकेडिंग; स्थानीय लोगों ने भूमिगत खनन और बालू भराव में लापरवाही को बताया वजह
Dhanbad landslide : धनबाद के जामाडोबा स्थित बड़कीटांड़-जीतपुर मुख्य सड़क पर भू-धंसान से बड़ा गोफ बनने के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों ने भूमिगत खनन के बाद बालू भराव नहीं किए जाने का आरोप लगाया है। घटना के 24 घंटे बाद भी प्रशासन की ओर से केवल बैरिकेडिंग की गई है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
झारखंड के कोयलांचल क्षेत्र धनबाद में एक बार फिर भू-धंसान की घटना ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जिले के जामाडोबा क्षेत्र स्थित बड़कीटांड़-जीतपुर मुख्य सड़क पर रविवार देर शाम अचानक जमीन धंसने से सड़क किनारे एक विशाल गोफ बन गया। देखते ही देखते सड़क का एक हिस्सा असुरक्षित हो गया, जिससे आसपास रहने वाले लोगों में दहशत फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और प्रशासन को इसकी जानकारी दी गई।
हालांकि घटना के 24 घंटे बीत जाने के बावजूद स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा। प्रशासन की ओर से केवल बैरिकेडिंग कर सड़क के प्रभावित हिस्से को घेर दिया गया, लेकिन तकनीकी जांच शुरू नहीं हो सकी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपस्थिति और धीमी कार्रवाई भविष्य में किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है।

तेज आवाज के साथ धंसी जमीन, मच गई अफरा-तफरी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रविवार देर शाम अचानक तेज आवाज सुनाई दी। कुछ ही क्षणों में सड़क किनारे की जमीन धंसने लगी और देखते ही देखते एक बड़ा गड्ढा बन गया। घटना के समय सड़क पर लोगों की आवाजाही जारी थी। अचानक हुई इस घटना से लोग घबरा गए और आसपास अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
स्थानीय लोगों ने तत्काल सड़क से गुजर रहे वाहनों को रोककर लोगों को सुरक्षित दूरी पर रहने की सलाह दी। घटना की सूचना संबंधित विभागों और प्रशासन को भी दी गई।
24 घंटे बाद भी केवल बैरिकेडिंग, लोगों में नाराजगी
सोमवार तक प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्र में केवल बैरिकेडिंग की गई। इससे लोगों की आवाजाही सीमित जरूर हुई, लेकिन भू-धंसान के कारणों की जांच या सुरक्षा संबंधी अन्य उपाय शुरू नहीं किए गए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद किसी वरिष्ठ अधिकारी या तकनीकी टीम का मौके पर नहीं पहुंचना चिंता का विषय है। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते वैज्ञानिक जांच और स्थायी समाधान नहीं किया गया तो सड़क का बड़ा हिस्सा धंस सकता है।
भूमिगत खनन और बालू भराव में लापरवाही का आरोप
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह घटना भूमिगत खनन के बाद निर्धारित नियमों के अनुसार बालू भराव नहीं किए जाने का परिणाम हो सकती है। उनका आरोप है कि कई वर्षों से इस इलाके में खनन कार्य होने के बाद खाली जगहों को पूरी तरह नहीं भरा गया, जिससे जमीन कमजोर होती चली गई।
लोगों का कहना है कि क्षेत्र में पहले भी भू-धंसान की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन हर बार अस्थायी उपाय कर मामले को शांत कर दिया जाता है। यदि समय रहते व्यापक स्तर पर जांच और सुधार कार्य नहीं किया गया तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
हजारों लोगों की आवाजाही वाला महत्वपूर्ण मार्ग
बड़कीटांड़-जीतपुर मुख्य सड़क क्षेत्र की महत्वपूर्ण सड़कों में शामिल है। इसी मार्ग से प्रतिदिन हजारों लोग अपने काम पर जाते हैं। स्कूल बसें, निजी वाहन, दोपहिया वाहन और भारी वाहन भी इसी रास्ते का उपयोग करते हैं।
ऐसे में सड़क किनारे लगातार बढ़ रहे गोफ को लेकर लोगों की चिंता स्वाभाविक है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि भू-धंसान का दायरा बढ़ा तो सड़क पूरी तरह प्रभावित हो सकती है, जिससे आवागमन बाधित होने के साथ-साथ जान-माल का भी बड़ा नुकसान हो सकता है।

विशेषज्ञों की तकनीकी जांच की मांग
ग्रामीणों और स्थानीय सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि भू-वैज्ञानिकों और खनन विशेषज्ञों की टीम तत्काल मौके का निरीक्षण करे। उनका कहना है कि केवल बैरिकेडिंग करना पर्याप्त नहीं है। पहले यह पता लगाया जाना चाहिए कि जमीन के नीचे कितनी खाली जगह है और आगे भू-धंसान का कितना खतरा बना हुआ है।
लोगों ने यह भी मांग की कि पूरे इलाके का सर्वे कराया जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।
कोयलांचल क्षेत्र में पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
धनबाद और आसपास के कोयलांचल क्षेत्रों में भू-धंसान की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। भूमिगत खनन वाले कई इलाकों में समय-समय पर जमीन धंसने की घटनाएं सामने आती रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने खनन क्षेत्रों की नियमित निगरानी और वैज्ञानिक तरीके से पुनर्भरण (फिलिंग) अत्यंत आवश्यक है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुराने खनन क्षेत्रों की समय-समय पर जांच होती रहे और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए, तो इस तरह की घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है।
लोगों की मांग—स्थायी समाधान निकाले प्रशासन
घटना के बाद क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन और संबंधित खनन प्रबंधन से जल्द ठोस कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल चेतावनी बोर्ड या बैरिकेडिंग लगाकर जिम्मेदारी पूरी नहीं की जा सकती।
लोग चाहते हैं कि प्रभावित क्षेत्र की वैज्ञानिक जांच कराई जाए, भू-धंसान के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी उपाय किए जाएं। साथ ही सड़क की सुरक्षा सुनिश्चित कर आम लोगों की आवाजाही को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाए।
फिलहाल बड़कीटांड़-जीतपुर मुख्य सड़क पर बने विशाल गोफ को लेकर लोगों में भय का माहौल बना हुआ है। सभी की निगाहें प्रशासन और संबंधित विभागों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

