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सरकार की कार्यशैली से झारखंड में पहली बार आदिवासी समाज में जगा सम्मान का भाव,मिलेगी पहचान।

रांची: झारखंड की राजनीति में पिछले तीन सालों में अगर किसी समाज का सबसे ज्यादा उत्थान हुआ है तो वह वर्षों से पिछड़ा रहा आदिवासी समाज है। आज राज्य में वैसे कामों को प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है, जिससे आदिवासी समाज के अंदर सम्मान का भाव जग पाए। इस काम को पूरा कर रही है झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार। सत्तारूढ़ हेमंत सोरेन सरकार का फोकस जनजातीय समाज पर इतना है कि आदिवासियत को अपनी पहचान मिल चुकी है। झारखंड के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब ट्राइबल हिस्ट्री पर सेमिनार का आयोजन हुआ। इसी तरह राज्य सरकार 13 लाख आदिवासी समाज के लिए लाइवलीवुड डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू करने जा रही है। पहली बार लगातार दो साल सफलतापूर्वक आदिवासी महोत्सव का आयोजन हुआ। पहली बार न केवल झारखंड में बिखरे संथाल, मुंडा, हो, खड़िया, असूर, बिरजिया जैसे आदिवासियों ब्लकि देश भर के आदिवासी को एकजुटता करने की कोशिश हुई। यह काम कोई और नहीं बल्कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व में संभव हो पाया है।

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संस्कृति और खून एक, समस्या भी एक तो लड़ाई भी एक होनी चाहिए।

बता दें कि देश के पहले किसी आदिवासी नेता ने अगर देशभर के 13 करोड़ से ज्यादा आदिवासियों को हक के लिए एकजुट होने का आह्वान किया है तो वे सीएम हेमंत सोरेन है। सीएम ने कहा था कि आज आदिवासी समाज जाति-धर्म के आधार पर बंटा है। जबकि संस्कृति और खून एक है तो समाज भी एक होना चाहिए। समस्या भी एक जैसी है तो लड़ाई भी एक होनी चाहिए। इसके लिए सबको एक होना होगा।

13 लाख जनजातीय एवं आदिम जनजातीय परिवारों के लिए हेमंत सरकार शुरू करेगी लाइवलीवुड डेवलमेंट प्रोग्राम!

राज्य के 13 लाख जनजातीय एवं आदिम जनजातीय परिवारों के लिए हेमंत सोरेन सरकार लाइवलीवुड डेवलमेंट प्रोग्राम शुरू कर सकती है। यह आदिवासियों के लिए ड्रीम प्रोजेक्ट होगा जिसे राज्य के 14 जिलों में शुरू किया जाएगा। कुल 2025.54 करोड़ रुपये का खर्च वाले इस योजना का नाम झारखंड ट्राइबल इंपावरमेंट लाइवलीवुड (जेटीईएल) फेज 2 औऱ झारखंड ट्राइबल लाइवलीवुड डेवलमेंट प्रोग्राम। पहले प्रोजेक्ट पर 1880.54 करोड़ रुपये का खर्च किए जाएंगे। वहीं दूसरे प्रोजेक्ट पर 145 करोड़ । पहला प्रोजेक्ट 8 साल का होगा तो दूसरे प्रोजेक्ट में 5 साल लगेंगे। दोनों प्रोजेक्ट से 14 टीएसपी आदिवासी जिलों के गावों के विकास के लिए उन्नत कृषि, उन्नत पशुधन विकास, जल स्रोतों का विकास, सिंचाई सुविधा का विकास, कृषक सुविधा केंद्र, सोलर आधारित सिंचाई प्रणाली का विकास, उन्नत कृषि उपकरणों की आपूर्ति, उन्नत वानिकी पर आधारित फसल, सब्जी की खेती, गैर वन उत्पाद को बढ़ावा दिया जाएगा।

सीएम ने कहा था, देश की इतिहास में आदिवासियों को जगह नहीं मिली, ट्राइबल हिस्ट्री पर सेमिनार सहाय‌क होगा।

ट्राइबल हिस्ट्री पर झारखंड सरकार के आदिवासी कल्याण विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय सेमिनार का बीते बुधवार को समापन हुआ। डॉ रामदयाल मुंडा शोध संस्थान में आयोजित सेमिनार के अंतिम दिन उपस्थित हुए विभागीय सचिव राजीव अरुण एक्का‌ ने कहा कि कई विषयों पर शोध कार्य हो चुका है, इसलिए अब द्वितीय चरण में आदिवासियों की जनसंख्या बढ़ोतरी दिशा में काम करना है। ऐसा इसलिए ताकि वे आगे अस्तित्व में रहे। बता दें, ट्राइबल हिस्ट्री पर सेमिनार इसलिए भी जरूरी है ताकि आदिवासियों को अपने इतिहास को जानने का अवसर मिले। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले इस बात को कह चुके हैं कि देश की इतिहास में आदिवासियों को वह जगह नहीं मिली है जो मिलनी चाहिए थी।

जनजातीय कला- संस्कृति, रहन- सहन, खानपान, पहनावा और भाषा को विश्व पटल में पहचान देने का हुआ काम।

हेमंत सोरेन सरकार राज्य की जनजातीय कला-संस्कति को देश-दुनिया में पहचान दिलाने के लिए प्रयासरत है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने घोषणा किया था कि हर साल आदिवासी दिवस के मौके पर 9 और 10 अगस्त को झारखंड आदिवासी महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसके माध्यम से आदिवासियों के रहन-सहन, खान-पान और परंपरा से सभी को परिचित कराने की कोशिश होगी। मुख्यमंत्री की घोषणा काफी रंग लाई। पिछले 2 सालों (2022, 2023) में विश्व आदिवासी महोत्सव का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। महोत्सव के माध्यम से यहां के जनजातीय कला- संस्कृति, रहन- सहन, खानपान, पहनावा और भाषा को विश्व पटल में पहचान देने का काम हुआ है।

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सरकार की कार्यशैली से झारखंड में पहली बार आदिवासी समाज में जगा सम्मान का भाव,मिलेगी पहचान। 1