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डीवीसी ने JBVNL को दी राहत घटाया 1619.42 करोड़ रूपये का बकाया, लंबे समय से चल रहा था विवाद

Shah Ahmad

दामोदर घाटी निगम ने झारखंड की बिजली वितरण निगम को एक राहत दी है कोरोना संक्रमण का मार झेल रही झारखंड के वित्तीय परेशानियां भी अनेक है इस बीच डीवीसी की तरफ से किए गए कार्य के बाद झारखंड के लिए सुकून देने वाली खबर आई है.

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दामोदर घाटी निगम ने बिजली वितरण निगम के पास अपने कुल बकाए की राशि में कमी करने की सहमति दे दी है यह राशि 1619.42 करोड रुपए है डीवीसी के द्वारा पूर्व में दावेदारी की जा रही थी कि 5608.32 करोड रुपए झारखंड सरकार के पास बकाया हैं इसी में शामिल विवादित राशि 1619.42 करोड रुपए भी था जिसे हटा लिया गया है. डीवीसी के इस निर्णय के बाद अब झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड पर डीवीसी का कुल बकाया 3988.90 करोड़ों रुपए हो गए हैं इस राशि में डीवीसी सरकार के साथ हुए समझौते के तहत 1417.50 करोड़ की राशी केंद्र सरकार के द्वारा काटी जा चुकी है.

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राशि घटाने और केंद्र सरकार के द्वारा राज्य सरकार से 1417.50 करोड रुपए काटी जाने के बाद डीवीसी का कुल बकाया 2571.40 करोड ही बचा है. बता दें कि डीवीसी का 5608.32 करोड रुपए बकाया नहीं चुकाया जाने पर केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने झारखंड सरकार के खाते से 1417.50 काट लिए थे. 15 अक्टूबर 2020 को राज्य सरकार के आरबीआई के खाते से राशि काटी गई थी वही ऊर्जा विभाग की तरफ से झारखंड सरकार को दिए गए नोटिस में यह कहा गया था 1470.50 करोड की दूसरी किस्त जनवरी 2021, अप्रैल और जुलाई में वसूल किया जाना है बकाया कम होने के बाद केंद्र सरकार ने कटौती राशि को भी घटा दिया है अब 2571.40 करोड बकाया राशि को तीन किस्तों में काटा जाएगा इस लिहाज से लगभग 700 करोड रुपए की राशि की राशि का भुगतान बिजली वितरण निगम करेगा इसी माह में दूसरी किस्त की राशि केंद्र सरकार कभी भी कटौती कर सकती है.

क्या है पूरा मामला जिस वजह से घटाई गई राशि

दरअसल, डीवीसी द्वारा नियामक आयोग को भेजी जाने वाली ऑडिट में वर्ष 2006 से 2016 तक के अकाउंट का अपटूडेट नहीं दिया गया है झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड का दावा है कि इस दौरान डीवीसी ने ज्यादा राशि ले ली थी इस विवादित राशि का मामला अपीलेट ट्रिब्यूनल मैं चल रहा है इस विवाद के मद्देनजर डीवीसी के अध्यक्ष और राज्य के मुख्य सचिव के बीच हुई बातचीत में मुख्य सचिव ने डीवीसी के अध्यक्ष को राशि घटाने को लेकर एक पत्र भेजा जिसके बाद निर्णय हुआ कि जब तक अपीलेट ट्रिब्यूनल से कोई फैसला नहीं हो जाता तब तक राशि को कुल बकाया बिल से हटा दिया जाता है.

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