लॉकडाउन होने की वजह से छिन गया रोजगार, युवक ने फांसी लगाकर की आत्महत्या

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एक तरफ कोरोना महामारी के कारण पूरे देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गयी है तो दूसरी तरफ लॉकडाउन के कारण गरीब और माध्यम वर्ग के सामने भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है. सरकारे लाख दावा कर ले की भूख से मौत नहीं होती लेकिन सच्चाई ये है अक्सर झारखण्ड में भूख से मौते होती चली आ रही है. सरकार चाहे एनडीए की हो या यूपीए की सरकार अपने ऊपर भूख से हुई मौत का जिम्मा नहीं लेती है बल्कि अधिकारियों या फिर अन्य कोई समस्या बता कर मामले को टाल दिया जाता है.

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ताजा मामला धनबाद जिला के निरसा के गलफरबाड़ी ओपी क्षेत्र अंतर्गत एग्यारकुण्ड दक्षिण पंचायत का है. जहाँ 17 वर्षीय लड़के ने आर्थिक तंगी होने की वजह से फांसी लगा कर आत्महत्या कर लिया है. युवक की मौत रविवार शाम 3 बजे हुई है ऐसा बताया जा रहा है. लेकिन परिवार वालो को रात 9 बजे इसकी भनक लगी. पुलिस ने शव को कब्जे में कर पोस्टमार्टम की तैयारी में जुट गयी है। मृतक ट्रक खलासी था और लॉकडाउन में काम नहीं मिलने से वह तनाव में था.

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आत्महत्या करने वाले युवक की मां कल्याणी बाउरी ने कहा है कि बेटा सुबह ही घर से निकल गया. दोपहर तीन बजे घर आया तो खाना खाने के लिए मैंने कहा लेकिन उसने खाना नहीं खाऊंगा ऐसा कहा, उसने कहा कि वह सोयेगा और बाद खाना खायेगा.

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शाम तक जब वह नहीं उठा तो उसे जगाने के लिए मैंने दरवाजा खटखटाया और आवाज लगायी। लेकिन कोई जवाब नहीं मिलने पर दरवाजा को धक्का मारकर खोली. तो देखा कि टाली के घर के मुख्य लकडी में फंदे से झूल रहा है. जिसके बाद पति संजय बाउरी और भाई दिलीप बाउरी को आवाज लगायी। दोनों आये और फंदे से उसे उतारा। लेकिन तबतक उसकी मृत्यु हो चुकी थी.

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आत्महत्या करने वाले युवक की माँ कल्पना बाउरी ने बताया की शनिवार से ही हमारे घर में चूल्हा नहीं जला था. और न ही हमारे पास राशन कार्ड है, लॉकडाउन होने के कारण परिवार बेरोजगार है. बेटा ट्रक में खलासी था. पडोसी के यहाँ से चावल मांग कर रविवार को खाना बनाई थी.

गलफरबाड़ी ओपी प्रभारी बीएन सिंह ने कहा कि मृतक गांजा का सेवन करता था। माता-पिता का इकलौता था इसलिए वो अक्सर इनकी बात भी नहीं सुनता था. मामले की जाँच की जा रही है जल्द ही स्थिति स्पष्ट होगी।

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