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पुलिस और सहायक पुलिसकर्मियों के बीच झड़प के बाद दर्ज हुई FIR, जानिए क्यूँ कर रहे है आंदोलन

रांची के मोहराबदी मैदान में 12 सितंबर से राज्य भर के सहायक पुलिसकर्मी आंदोलन कर रहे है. उनका कहना है कि हमे स्थाई करने कि पहल सरकार कि तरफ से करनी चाहिए. लेकिन सरकार इस ओर कोई भी ध्यान नहीं दे रही है. मोहराबदी में आंदोलन कर रहे सहायक पुलिसकर्मी शुक्रवार को तब उग्र हो गए जब वे अपनी मांगो को मनवाने के लिए मुख्यमंत्री आवास और राजभवन घेरने जा रहे थे. CM आवास और राजभवन जाने के दौरान जिला पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बेरिकेटिंग कर रखा था. बेरिकेटिंग के पास पहुँचने के बाद सहायक पुलिसकर्मी उग्र हो गए और बेरिकेटिंग तोड़ कर CM आवास कि तरफ जाने का प्रयास करने लगे. इस बीच सहायक पुलिसकर्मियों कि तरफ से रांची जिला पुलिस बल पर पत्थर फेके गए. स्थिति से निपटने और भीड़ को एकत्रित होने से रोकने के लिए रांची पुलिस ने उनपर लाठीचार्ज किया और आँसू गैस के गोले छोड़े. जिला पुलिस और सहायक पुलिसकर्मियों के बीच हुए झड़प में दोनों तरफ के कई लोग घायल हुए है.

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झड़प होने के बाद रांची पुलिस के द्वारा विभिन्न धाराओ के तहत 30 को नामजद और तक़रीबन 1000 सहायक पुलिसकर्मियों पर लालपुर थाना में FIR दर्ज किया गया है. जिन धाराओ के तहत FIR दर्ज हुआ है उनमें 307,353,323 324 शामिल है. इससे पूर्व भी सहायक पुलिसकर्मियों के द्वारा CM आवास और राजभवन घेरने का प्रयास किया गया था जिसके बाद Covid-19 और धारा 144 का उल्लंघन करने के कारण विभिन्न धाराओ के तहत FIR दर्ज हुआ है.

सहायक पुलिसकर्मी क्यूँ कर रहे है आंदोलन:

दरअसल, वर्ष 2017 में जब राज्य में रघुवर दास कि सरकार थी उस वक्त राज्य के 12 नक्सल प्रभावित जिले में सहायक पुलिसकर्मियों कि नियुक्ति कि गई थी. जिन्हें 10,000 मानदेय के साथ नियुक्त किया गया था. सहायक पुलिसकर्मी लगातार इस बात को कह रहे है कि जिस वक्त उनकी नियुक्ति कि गई थी उस वक्त उन्हें बताया गया था कि 3 साल नौकरी करने के बाद उन्हें स्थाई कर दिया जायेगा लेकिन 3 वर्ष पुरे होने के बाद भी उन्हें स्थाई नहीं किया जा रहा है. इसी स्थायीकरण को लेकर सहायक पुलिसकर्मी आंदोलन कर रहे है. इस बीच एक लेटर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमे दावा किया जा रहा है कि पूर्व कि रघुवर सरकार में जिन सहायक पुलिसकर्मियों को नियुक्त किया गया है उन्हें स्थाई करने का कोई प्रावधान नहीं है.

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