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UPSC Success Story
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UPSC Success Story: हजारीबाग की श्रुति मोदी ने पांचवें प्रयास में हासिल की सफलता, 569वीं रैंक से बढ़ाया झारखंड का मान

Megha Sinha
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UPSC Success Story : बैंक क्लर्क की नौकरी के साथ जारी रखी तैयारी, संघर्ष और धैर्य से हासिल किया सिविल सेवा परीक्षा में मुकाम

UPSC Success Story : झारखंड के हजारीबाग जिले की श्रुति मोदी ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 569वीं रैंक हासिल कर क्षेत्र और राज्य का नाम रोशन किया है। पांचवें प्रयास में मिली यह सफलता उनके संघर्ष, मेहनत और दृढ़ संकल्प की प्रेरणादायक कहानी है।

UPSC Success Story : झारखंड के हजारीबाग जिले के चलकुशा प्रखंड अंतर्गत जमसोती गांव की रहने वाली श्रुति मोदी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में 569वीं रैंक प्राप्त की है। इस उपलब्धि के बाद उनके परिवार, गांव और पूरे इलाके में खुशी और गर्व का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि श्रुति की यह सफलता क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

श्रुति मोदी की सफलता की कहानी संघर्ष, मेहनत और निरंतर प्रयास की मिसाल है। 26 वर्षीय श्रुति ने अपनी तैयारी के दौरान कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपने लक्ष्य को सामने रखते हुए लगातार मेहनत जारी रखी और अंततः यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता हासिल की।

बताया जाता है कि श्रुति का जन्म झुमरी तिलैया में अपने नाना गोपी कृष्ण मोदी के घर हुआ था। उनके मामा राजेश कुमार मोदी के अनुसार श्रुति बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी और मेहनती रही हैं। शिक्षा के प्रति उनका समर्पण और अनुशासन ही उनकी सफलता का मुख्य आधार बना।

श्रुति की खास बात यह रही कि उन्होंने नौकरी के साथ-साथ अपनी पढ़ाई और यूपीएससी की तैयारी भी जारी रखी। वह पहले बैंक क्लर्क के रूप में कार्य कर चुकी हैं। नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच समय निकालकर उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और अपने लक्ष्य की दिशा में लगातार आगे बढ़ती रहीं। कई बार असफलता मिलने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और हर बार अपनी तैयारी को और बेहतर बनाया।

उनके परिवार की पृष्ठभूमि भी शिक्षा और मेहनत से जुड़ी रही है। फिलहाल उनका परिवार दिल्ली में रहता है। उनके पिता सीताराम मोदी पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और परिवार में शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी जाती रही है। श्रुति के भाई-बहन भी अपने-अपने क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर चुके हैं।

परिवार के सदस्यों का कहना है कि श्रुति का सपना शुरू से ही प्रशासनिक सेवा में जाने का था ताकि वह समाज के लिए कुछ बेहतर कर सकें। इसी लक्ष्य को लेकर उन्होंने लगातार तैयारी की और अंततः पांचवें प्रयास में सफलता हासिल कर अपने सपने को साकार कर दिखाया।

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इसमें सफलता प्राप्त करने के लिए वर्षों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और धैर्य की आवश्यकता होती है। श्रुति मोदी की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार की जाए तो कठिन से कठिन मुकाम भी हासिल किया जा सकता है।

श्रुति की उपलब्धि से हजारीबाग सहित पूरे झारखंड में खुशी की लहर है। स्थानीय लोगों और युवाओं ने इसे प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि श्रुति की कहानी से कई युवाओं को अपने सपनों को पूरा करने की प्रेरणा मिलेगी।