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हेमन्त सरकार ने लिया बड़ा फैसला, कोरोना काल के दौरान श्रमिकों पर दर्ज़ मुक़दमे होंगे वापस

रांची: कोरोना काल में जारी लॉकडाउन प्रावधानों के उल्लंघन के फलस्वरूप दर्ज प्राथमिकी को वापस लेने की स्वीकृति मंत्रिपरिषद की बैठक में दी गई है। पूरे राज्य में प्रवासी मजदूरों द्वारा लॉकडाउन उल्लंघन की कुल 30 प्राथमिकी दर्ज की गई है। जिसमें 204 मजदूरों को आरोपी बनाया गया है।

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इसमें रांची के सिल्ली थाना में 32 मजदूरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है।वही, लोहरदगा के विभिन्न थानों में 15, सिमडेगा में दो, जमशेदपुर में एक, चाईबासा में 5, दुमका में एक, साहिबगंज में 4 और पाकुड़ जिले में एक प्राथमिकी थाने में दर्ज है।

कोरोना कालखण्ड में प्रवासी श्रमिकों के सम्मान पर नहीं आई आंच:

लॉकडाउन के क्रम में राज्य के प्रवासी श्रमिकों पर सरकार ने आंच नहीं आने दी। श्रमिकों के लिए 27 मार्च 2020 को 24 घंटे संचालित कोविड-19 माइग्रेंट वर्कर कंट्रोल रूम की स्थापना की गई। वेब पोर्टल लांच हुआ। पोर्टल में 7.50 श्रमिकों ने निबंधन कराया। आठ लाख श्रमिक, श्रमिक स्पेशल ट्रेन से लाये गए। 484 श्रमिक लेह-लद्दाख और अंडमान द्वीप समूह से एयरलिफ्ट हुए। 600 बस पड़ोसी राज्य में श्रमिकों को लाने के लिए भेजा गया।

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प्रवासी श्रमिकों को आर्थिक सहायता पहुंचाने के लिए सम्मानित राशि श्रमिकों को DBT के जरिये उनके बैंक खाते में भेजी गई। श्रमिकों के लिए मुख्यमंत्री दीदी किचन एवं मुख्यमंत्री विशेष दीदी किचन के संचालन हेतु करीब 38 करोड़ रुपये निर्गत हुए। बिरसा हरितग्राम योजना, नीलाम्बर-पीताम्बर जल समृद्धि योजना, पोटो हो खेल विकास योजना के जरिये श्रमिकों के लिए 25 करोड़ मानव दिवस सृजन करने एवं लाखों श्रमिकों के खाते में 20 हजार करोड़ देने का लक्ष्य तय किया गया। श्रमिकों के स्किल मैपिंग एवं कौशल विकास के लिए 5, 30, 541 श्रमिकों का डाटाबेस तैयार किया गया है।

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