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दिवाली से पूर्व झारखंड के आदिवासियों को हेमंत सरकार का तोहफा, सरना धर्मकोड का प्रस्ताव पारित

Shah Ahmad
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आदिवासी समाज की ओर से लंबे समय से यह मांग की जा रही थी की जनगणना में उनका एक अलग धर्मकोड होना चाहिए परंतु झारखंड में सरकारी बदलती गई लेकिन उनकी समस्या का हल किसी भी सरकार में नहीं निकल पाया 2019 के विधानसभा चुनाव में जीत कर आई हेमंत सोरेन की सरकार ने उनकी मांगों को मानते हुए 11 नवंबर 2020 को झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर आदिवासी सरना धर्म कोड के प्रस्ताव को पारित करके केंद्र सरकार को भेज दिया है.

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सरना धर्मकोड के प्रस्ताव को विधानसभा से पारित होने के बाद पूरे प्रदेश के आदिवासी समाज में एक जश्न का माहौल है. झारखंड की राजधानी रांची में प्रस्ताव पास होने की खबर मिलने के बाद आदिवासी समुदाय के लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा के साथ एक भव्य जुलूस निकाला जिसमें सरकार को धन्यवाद करते हुए अपनी खुशी जाहिर की आदिवासी समाज का कहना है कि सरना धर्म कोड का प्रस्ताव पारित होने के बाद 2021 की जनगणना में कोड शामिल होता है तो हमें एक अलग पहचान मिलेगी

विधानसभा के पटल पर आदिवासी सरना धर्म कोड के प्रस्ताव को सत्ता पक्ष की तरफ से रखे जाने के बाद भाजपा के विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा ने इस पर सवाल खड़े किए परंतु जैसे-जैसे चर्चा आगे बढ़ी भाजपा की तरफ से उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनके दिए गए सुझाव को मानते हुए प्रस्ताव में संशोधित कर प्रस्ताव को पारित किया गया है.

झारखंड से सरना धर्म कोड का प्रस्ताव पारित होने के बाद आदिवासी समुदाय में जश्न का माहौल है दिवाली से पूर्व प्रस्ताव को पारित करके राज्य की हेमंत सोरेन सरकार ने राज्य की सबसे बड़ी आबादी आदिवासी समुदाय को एक बड़ा तोहफा दिया है सदन में आदिवासी समुदाय को सरना धर्म कोड के लागू होने से क्या फायदे होंगे मुख्यमंत्री ने इस पर चर्चा किया है. मुख्यमंत्री ने कहा सरना धर्म कोड के लागू होने से आदिवासी समाज को एक विशेष पहचान तो मिलेगी ही साथ ही उन्हें पूरी तरह से सरकारी लाभ भी मिल पाएगा.

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