हेमंत की लोकप्रियता के सामने मोदी और शाह की नहीं चली, तो बाबूलाल कितना टक्कर दे पायेंगे

Shah Ahmad
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झारखण्ड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी तक़रीबन 13 सालो के बाद फिर से भाजपा में घर वापसी कर चुके है. भाजपा में शामिल होने के बाद बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी मिलने जा रही है. सोमवार को भाजपा के विधायकों की बैठक है उसी बैठक में ये तय किया जायेगा की नेता प्रतिपक्ष कौन होगा। लेकिन प्राप्त जानकारी के अनुसार भाजपा में सब तय हो चूका है की बाबूलाल को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी जाएगी। अब सिर्फ औपचारिक घोषणा होना ही बाकि है. देखना दिलचस्प होगा की श्री मरांडी हेमंत सरकार को कितना घेर पाती है.

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बाबूलाल मरांडी के सहारे भाजपा अपने गिरते हुए कद को बचाने की जुगाड़ में लग गयी है. साथ ही बाबूलाल मरांडी ने भी घर वापसी करके खुद के गिरते हुए राजनितिक वजूद को भी बचाने की कोशिश में लेकिन वो कितना कामयाब होंगे इसे वक़्त पर छोड़ देना चाहिए। बाबूलाल मरांडी को साथ ला कर भाजपा हेमंत सोरेन के सामने एक आदिवासी चेहरे को खड़ा कर रही है. ऐसा इसलिए क्यूंकि जिस भाजपा ने पांच साल तक सरकार चलाया उसे विधानसभा में आदिवासी चेहरा नहीं होने का नुकसान मालूम है. हेमत सोरेन आदिवासी समाज से आने के बावजूद बाबूलाल से उम्र में कम भी है जिसका फायदा उन्हें हो रहा है की वो युवाओ के साथ-साथ हर वर्ग के सबसे पसंदीदा नेताओ में से एक है.

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जिस प्रकार से हेमंत सोरेन को झारखण्ड की जनता पसंद कर रहे है इस लिहाजे से झारखण्ड में फ़िलहाल ऐसा कोई नेता दूर दूर तक नहीं दिख रहा है जो हेमंत सोरेन की बराबरी कर सके. झारखण्ड अलग की लड़ाई लड़ने वाले गुरु जी शिबू सोरेन से भी ज्यादा लोकप्रिय हेमंत सोरेन हो चुके है. भले ही वो रिश्ते में पिता-पुत्र है लेकिन लोकप्रियता के मामले में पुत्र ही आगे है. बाबूलाल मरांडी के सहारे भाजपा अपने खोये हुए वजूद को वापस पाना चाहती है.

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हेमंत की लोकप्रियता के सामने मोदी और शाह की भी नहीं चली:

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की करिश्माई जोड़ी भी हेमंत सोरेन की लोकप्रियता के सामने कुछ कमाल नहीं कर सकी और एक राज्य स्तर की पार्टी ने राष्ट्रीय पार्टी को शिकश्त दे डाली। झारखण्ड के कई बड़े-बड़े नेता फिलहाल हेमंत के सामने लोकप्रियता के मामले में पीछे है. भाजपा ने विधानसभा चुनाव के दौरान 65 प्लस के नारे के साथ मैदान में उतरी थी लेकिन जनता ने इस नारे को उल्ट जनमत भाजपा को दिया जिस कारण से हेमंत सोरेन और उनके गठबंधन के साथियो को पूर्ण बहुमत दे डाली।

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