
अन्य राज्यों की तरह झारखण्ड में भी लॉकडाउन 2.0 की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है. झारखण्ड सरकार कैबिनेट की मीटिंग के में लॉकडाउन को बढ़ाने को फैसला लेगी और तारीख भी तय किया जायेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सोमवार दोपहर कैबिनेट की बैठक होगी. इस बैठक में सरकार लॉकडाउन बढ़ाने पर निर्णय ले सकती है. राज्य सरकार कोरोना संकट को देखते हुए क्लास वन और टू के अधिकारियों के वेतन में 15 से 20 फीसदी तक कटौती करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा सकती है. विधायक निधि और लालू प्रसाद के पैरोल पर भी बैठक में विचार हो सकता है. कांग्रेस कोटे से मंत्री बादल पत्रलेख और जामताड़ा विधायक इरफ़ान अंसारी उनके पैरोल के लिए खुले तौर पर बोल चुके है.
कैबिनेट की बैठक में सरकार हर विधायक को 25 लाख रुपये देने का प्रावधान कर सकती है. ये पैसे मजदूरों और उनके परिवारों पर खर्च किया जाएगा. राज्य या राज्य के बाहर रहने वाले मजदूरों को भी दो हजार रुपये तक दिये जा सकते हैं. राज्य के बाहर फंसे करीब 7 लाख प्रवासी मजदूरों के परिवार, जो झारखंड में हैं, उनको भी सहायता राशि देने पर सरकार विचार कर रही है. इसके अलावा सरकार ने मनरेगा मजदूरी बढ़ाने के लिए केन्द्र से गुहार लगायी है. राज्य के वैसे मजदूर जो अभी तक मनरेगा में निबंधित नहीं हुए हैं, उन्हें भी निबंधन कराने का मौका दिया गया है.
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इस बीच राज्य सरकार ने लॉकडाउन में मजदूरों को रोजगार देने के लिए मास्टर प्लान तैयार कर लिया है. इसके तहत न केवल ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को लाभ मिलेगा, बल्कि उनके हुनरों का इस्तेमाल कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की कोशिश होगी. दरअसल कोरोना संकट का सबसे ज्यादा असर छोटे-मोटे काम कर अपने और परिवार का भरण पोषण करने वाले मजदूरों पर पड़ा है. संकट की इस घड़ी में झारखंड के वैसे मजदूर, जो या तो राज्य के बाहर हैं या अपने प्रदेश में लॉकडाउन के कारण घर बैठ गये हैं, उनके लिए सरकार ने वृहत योजना बनाई है. इन्हें मनरेगा के तहत काम देने के अलावा बीड़ी उद्योग, बांस के बरतन बनाने वाले, लकड़ी के सामान बनाने वाले कारीगर जैसे हुनरमंद लोगों को काम करने में सरकार सहायता पहुंचाएगी.
