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झारखंड हाईकोर्ट ने रद्द की सहायक अभियंता की मुख्य परीक्षा, जानिए हाईकोर्ट ने क्या दी है दलील

amarsid
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झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार से होने वाली झारखंड लोकसेवा आयोग के तहत संयुक्त सहायक अभियंता नियुक्ति प्रतियोगिता परीक्षा को अगले आदेश तक के लिए स्थगित कर दिया है. आयोग की तरफ से गुरुवार को झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्देश के आलोक में यह निर्णय लेते हुए इस संबंध में शाम में सूचना जारी की है.

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झारखंड सरकार के पथ निर्माण विभाग, जल संसाधन विभाग और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में सहायक अभियंता के 542 पदों पर नियुक्ति के लिए परीक्षा होनी थी. यह परीक्षा शुक्रवार 22 जनवरी से शुरू होने वाली थी जो दो पारियों में 24 जनवरी तक होनी थी. हाईकोर्ट के निर्णय के बाद मुख्य परीक्षा स्थगित किए जाने को लेकर अभ्यर्थियों में दिनभर संशय की स्थिति रही. परीक्षा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का एक जत्था रांची पहुंच गया था. तो वहीं कई लोग रास्ते में थे परीक्षा स्थगित होने की जानकारी मिलने के बाद अभ्यर्थी बड़ी संख्या में शाम को जेपीएससी कार्यालय पहुंच गए. तब उन्हें परीक्षा स्थगित किए जाने की सूचना दी गई. अभ्यर्थियों की संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन ने जेपीएससी कार्यालय के सामने पुलिस कर्मियों की तैनाती कर दी थी.

झारखण्ड हाईकोर्ट ने यह दलील दे कर रद्द की है परीक्षा:

जेपीएससी ने परीक्षा को झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश पर स्थगित किया है. जिसमें कोर्ट ने यह दलील दी है कि आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को 10 फ़ीसदी आरक्षण देने के मामले में एक फैसला सुनाया है. अदालत ने कहा है कि जब वर्ष 2019 में सरकार ने उक्त वर्ग के लोगों को 10 फ़ीसदी आरक्षण देने का निर्णय लिया है तो यह नियुक्ति पर उसी साल से लागू होगी ना कि पिछले साल से. बता दें कि रंजीत कुमार शाह ने सहायक अभियंता की नियुक्ति को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. उनका कहना था कि सहायक अभियंता नियुक्ति वर्ष 2015 से लेकर 2019 तक की है. इधर, झारखंड लोकसेवा आयोग ने संयुक्त सहायक अभियंता नियुक्ति परीक्षा स्थगित कर दी है. झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश के बाद यह परीक्षा स्थगित करने की सूचना जारी की है.

बता दें कि पूर्व की सरकार ने 23 फरवरी 2019 को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 फ़ीसदी आरक्षण देने का निर्णय लिया था और उसी के अनुसार नियुक्ति के लिए जेपीएससी को अधियाचन भी गई थी. परंतु इस नियुक्ति में वर्ष 2015 और 16 की वैकेंसी शामिल है. ऐसे में इस वर्ष में आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को आरक्षण नहीं दिया जा सकता क्योंकि कानून वर्ष 2019 में लागू हुआ है. जेपीएससी की तरफ से अधिवक्ता संजय पिपरवार और अधिवक्ता प्रिंस कुमार सिंह का कहना था कि सरकार की अदियाचना के अनुसार ही जेपीएससी ने विज्ञापन निकाल है और नियुक्ति की जा रही है.

अदालत ने सभी दलीलों को नकारते हुए कहा है कि वर्ष 2019 में जब कानून को लागू किया गया था तो इसके पिछले वर्षों की वैकेंसी में आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता है. इस मामले में जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सहायक अभियंता विज्ञापन को रद्द किया जाता है. अब सरकार संशोधित अधियाचन जेपीएससी को भेजें और उसके अनुसार ही जेपीएससी फिर से परीक्षा करवाएं.

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