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Jharkhand News : शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में बड़े फैसले, 100 नए सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस और ड्रॉपआउट कम करने पर जोर

Megha Sinha
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Jharkhand News : शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में बड़े फैसले, 100 नए सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस और ड्रॉपआउट कम करने पर जोर

Jharkhand News : राज्य में शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से आयोजित शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए। 100 नए सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस, रिटेंशन बढ़ाने, ड्रॉपआउट कम करने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया।

राज्य की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आयोजित शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में प्राथमिक शिक्षा और साक्षरता के क्षेत्र में राज्य के प्रदर्शन की समीक्षा की गई, जहां कई क्षेत्रों में सकारात्मक उपलब्धियों पर संतोष जताया गया। साथ ही भविष्य की योजनाओं और शिक्षा के स्तर को और बेहतर बनाने के लिए कई नई पहल पर जोर दिया गया।

Jharkhand News : शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में बड़े फैसले, 100 नए सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस और ड्रॉपआउट कम करने पर जोर 1

बैठक के दौरान यह बात सामने आई कि प्राथमिक शिक्षा और साक्षरता के क्षेत्र में राज्य ने कई क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया है। विशेष रूप से सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के छात्रों का इस वर्ष प्रदर्शन बेहतर रहा है। 10वीं कक्षा के परीक्षा परिणामों में सुधार देखा गया, लेकिन अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि आने वाले समय में इस परिणाम को और बेहतर बनाने के लिए ठोस रणनीति तैयार की जाए।

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। बच्चों को खेल, कला, विज्ञान, तकनीक और अन्य रचनात्मक क्षेत्रों में भी आगे बढ़ने के अवसर मिलने चाहिए। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ-साथ अन्य गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाए।

शिक्षा विभाग को नए 100 सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस जल्द शुरू करने की दिशा में तेजी से काम करने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा जगुआर कैंपस में दिशोम गुरुजी शिबू सोरेन आवासीय विद्यालय को भी जल्द शुरू करने पर विशेष जोर दिया गया। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

बैठक में स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति और रिटेंशन बढ़ाने को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या कम करने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएं। खासकर बच्चियों के बीच ड्रॉपआउट रेट को कम करने के लिए अलग रणनीति तैयार करने की बात कही गई। माना जा रहा है कि यदि बच्चियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए तो समाज के विकास को भी नई दिशा मिल सकती है।

राज्य के कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी भी एक महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में सामने आई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि एकल शिक्षक वाले स्कूलों में शिक्षकों की संख्या बढ़ाई जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। साथ ही शिक्षकों की नियुक्ति और उनकी उपलब्धता को लेकर भी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर भी बैठक में विशेष फोकस रहा। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि छात्रों को सिर्फ पाठ्यपुस्तक आधारित शिक्षा तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें व्यावहारिक और आधुनिक शिक्षा से भी जोड़ा जाए। इसके लिए शिक्षकों को नवाचार आधारित प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में यह सुझाव भी दिया गया कि बच्चों को एक्सपोजर विजिट पर ले जाया जाए ताकि वे अपने आसपास की दुनिया को बेहतर तरीके से समझ सकें और नए अनुभव प्राप्त कर सकें। इससे बच्चों में सीखने की क्षमता और रचनात्मकता विकसित होगी।

एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा शिक्षकों को प्रशासनिक कार्यों से दूर रखने का भी रहा। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों का बोझ कम किया जाए ताकि वे अपना अधिकतम समय बच्चों को पढ़ाने और उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने में लगा सकें।

शिक्षा विभाग की इस समीक्षा बैठक को राज्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि दिए गए निर्देशों पर प्रभावी ढंग से अमल किया जाता है, तो आने वाले समय में राज्य की शिक्षा प्रणाली और अधिक मजबूत हो सकती है। इससे न केवल बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि उनके भविष्य को भी नई दिशा मिल सकेगी।