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आंदोलन के बल पर केन्द्र और राज्य सरकार को बातचीत के लिए बाध्य किया था गुरूजी ने, और फिर बन गया झारखंड

Shah Ahmad
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झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष शिबू सोरेन यानी गुरुजी आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं. शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को गोला में हुआ था. उनके लगभग 40 साल के संघर्ष के बल पर ही झारखंड अलग राज्य बनी है.

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गुरुजी जिन्होंने झारखंड अलग राज्य के लिए लगभग 40 साल तक संघर्ष किया. इन 40 वर्षों के दौरान उनका अधिकांश समय जंगल, पहाड़ों और गांव में बीता. गुरुजी लगातार लोगों को एकजुट करते और उन्हें संघर्ष करना सिखाते रहे और उन्हें सही राह दिखाते रहे. गुरुजी ने हीं आदिवासियों की जमीन वापस कराई और उन्हें सामाजिक बुराइयों से दूर रखने का भी अभियान चलाया. सिर्फ झारखंड में ही नहीं बल्कि गुरुजी ने बिहार की राजधानी पटना, पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता और देश की राजधानी दिल्ली की सड़कों पर भी अलग राज्य के लिए आंदोलन किया. साथ ही उन्होंने विधानसभा और लोकसभा में भी झारखंड अलग राज्य की बात को प्रमुखता से उठाया. यही वजह थी कि आंदोलन के बल पर गुरु जी ने केंद्र और तत्कालीन बिहार सरकार को बातचीत के लिए मजबूर कर दिया और अंततः जीत हुई और प्यारा झारखंड राज्य बना.

झारखंड अलग राज्य आंदोलन के बीच एक ऐसा वक्त भी था जब महाजनों ने और उस वक्त की पुलिस ने गुरुजी को मारने का प्रयास भी किया था. परंतु जनता का इतना बड़ा उन्हें समर्थन प्राप्त था कि उनका कुछ भी नहीं बिगड़ा और उन्होंने अपना कार्य आंदोलन के रूप में जारी रखा. गुरुजी के अंदर वह सारे गुण है जो एक आंदोलनकारी के अंदर होती है. गुरुजी एक आदिवासी नेता है, एक राजनीतिक भी हैं, झारखंड आंदोलनकारी हैं, और एक समाज सुधारक भी हैं. गुरुजी के अनेक रूप है जिसके दीवाने आज भी झारखंड के लोग है.

1970 के बाद झारखंड आंदोलन टूटने की स्थिति में आ चुकी थी यह वही दौर था जबी मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा का निधन हुआ था. उनके निधन से झारखंड आंदोलन को दिशा देने वाला कोई नहीं था और इसी बीच गुरुजी लोगों के बीच आए और उन्होंने झारखंड आंदोलन को टूटने से बचाया. गुरुजी ने इस संकट से उबारने के लिए बिनोद बिहारी महतो और एके राय के साथ मिलकर चल रही खटास को दूर किया. हालांकि, बाद में तीनों ही नेता अलग अलग हो गए लेकिन तब तक झारखंड आंदोलन को एक दिशा मिल चुकी थी और आंदोलन चरम पर था. यह मात्र एक संयोग नहीं था बल्कि इसके लिए शिबू सोरेन ने गोला, पेटरवार, जैनमोड़, बोकारो, धनबाद से लेकर टुंडी और संथालपरगना तक जाकर महाजनी प्रथा के खिलाफ लड़ाई लड़ी और आदिवासियों को जमीन पर उनका हक दिलाया.

गुरुजी शिबू सोरेन को जानने वाले लोग कहते हैं कि उनका दिल बहुत बड़ा है. राजनीति में लंबे समय से है. कई साथी ने उनका साथ बीच में छोड़ दिया लेकिन जब भी वे वापस लौटना चाहें तो गुरुजी ने उन्हें उसी उत्साह से उन्हें गले भी लगाया. गुरुजी सदैव अपनी बात अपनी तरीके से कहने में कभी हिचकते चाहे किसी को बुरा लगे या भला इसकी चिंता भी नहीं करते अस्पष्ट बात करते हैं. अपनी बात रखने की अद्भुत कला उनके पास है. गुरुजी ने बचपन से ही शराब के खिलाफ दूरी बनाकर रखी है. शराब के खिलाफ उन्होंने लंबा अभियान भी चलाया है शुद्ध शाकाहारी हमेशा से रहे हैं.

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