Skip to content

17 फ़रवरी को जेवीएम का भाजपा में विलय, नेता प्रतिपक्ष होंगे बाबूलाल मरांडी

झारखण्ड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी तक़रीबन 13 सालो के बाद फिर से भाजपा में घर वापसी कर रहे है. भाजपा में शामिल होने के बाद बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी मिलने जा रही है. 17 तारीख को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा इस विलय समारोह में शामिल होंगे जिसके बाद नेता प्रतिपक्ष की घोषणा होगी।

Also Read: स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने रांची प्रेस क्लब में एम्बुलेंस सेवा का किया उद्घाटन

लम्बी लड़ाई के बाद जब साल 2000 जब झारखण्ड बिहार से अलग हुआ उस वक़्त केंद्र में अटल जी की सरकार थी यानी भाजपा की सरकार थी जिसका फायदा भी भाजपा को मिला। प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में बाबूलाल मरांडी को झारखण्ड का कमान सौपा गया. लेकिन वो ज्यादा दिन टिक ना सके और साल 2003 में उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दे दिये और मुख्यमंत्री के पद को भी त्याग दिया। जिसके बाद बाबूलाल मरांडी लोकसभा का चुनाव लड़ कोडरमा से लोकसभा पहुंचे।

Also Read: निशिकांत दुबे का बड़ा बयान, कहा प्रदीप यादव कांग्रेस में गए तो 10 विधायक छोड़ देंगे कांग्रेस का साथ

साल 2006 में बाबूलाल मरांडी ने अपनी एक पार्टी बनायीं जिसका नाम उन्होंने झारखण्ड विकास मोर्चा रखा और चुनाव चिन्ह कंघी। झाविमो गठन के बाद बाबूलाल मरांडी कभी सत्ता में नहीं रहे. 2014 के विधानसभा चुनाव में जब झाविमो के 8 विधायक जीते थे और उसमे से 6 विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया था उस समय बाबूलाल मरांडी और उनकी पार्टी को जोर का झटका लगा था. इस मुद्दे को लेकर वो अदालत के दरवाजे तक पहुंच गए लेकिन हाथ कुछ नहीं लगा, लेकिन स्थिति अब ऐसी है की वो खुद अब भाजपा में जा रहे है और उन्हें रोकने का प्रयास करने वाला कोई नहीं।

Also Read: इरफ़ान अंसारी ने सीएम से की मुलाकात, कहा भाजपा मानसिकता वाले अधिकारियो का तबादला करे सरकार

नेता प्रतिपक्ष बनाये जायेंगे बाबूलाल मरांडी:

हाल ही में संपन्न हुए 2019 विधानसभा चुनाव में बाबूलाल मरांडी की पार्टी कुछ कमाल नहीं कर पायी। 81 विधानसभा सीटों पर लड़ने वाली झाविमो को सिर्फ तीन सीट ही हाथ लग पायी जिनमे से पार्टी के बड़े नेता ही जीत पाए, पोड़ैयाहाट से लगातार जितने वाले प्रदीप यादव ने जीत हासिल कर अपना किला बचाने में कामयाब हुए तो वही बंधू तिर्की ने मंडार और बाबूलाल मरांडी ने राजधनवार से जीत हासिल करने में कामयाब रहे. भाजपा में विलय के लिए प्रदीप यादव और बंधू तिर्की तैयार नहीं थे जिस कारण उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया

Also Read: डॉ सबा अहमद का बड़ा बयान कहा- बाबूलाल मरांडी ने झारखंड की जनता को धोखा दिया

मिली जानकारी के अनुसार भाजपा बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी देने की तैयारी मे है. विलय समारोह के दिन पार्टी के कई बड़े नेता मौजूद रहेंगे। कुछ दिनों पहले दिल्ली में सांसदों के साथ जेपी नड्डा बैठक की थी जिसमे संगठन को ले चर्चा हुयी थी उसी बैठक में ये तय हुआ की श्री मरांडी को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देने की बजाय नेता प्रतिपक्ष बनाया जाये।

Also Read: मोमेंटम झारखंड की होगी जाँच एसीबी ने सरकार से जाँच शुरू करने की मांगी अनुमति

बाबूलाल मरांडी के नेता प्रतिपक्ष बनाये जाने के पीछे ये तर्क दिया जा रहा है की हेमंत सोरेन एक आदिवासी चेहरा है और एक आदिवासी चेहरे के सामने आदिवासी चेहरे को ही सामने किया जाये। जबकि संगठन चलने के लिए ओबीसी जैसे वर्गो का इस्तेमाल किया जाये। इन्ही कारणों से भाजपा के आलाकमान अबतक अपना प्रदेश अध्यक्ष नहीं चुन सके है और सम्भवता ये माना जा रहा है की 17 फरवरी के बाद नये प्रदेश अध्यक्ष को चुन लिया जायेगा।