

राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण के दौरान पूरे राज्य में पिछले तीन वर्षो में 62000 से ज्यादा पेड़ काटे गये है। तो वही 20990 पेड के ट्रासप्लांड करने का दावा विभाग का है। वर्ष 2015 में हाईकोट ने स्वयं संज्ञान लिया था जिसके बाद दुर्लभ प्रजाति के पेड़ बचाने के लिए आदेश पारित हुआ था। इसी बीच एक बार फिर फोरलाइन निर्माण में पेड़ो की कटाई और ट्रांसप्लांड जैसे-तैसे शुरू कर दिया गया है।
कोडरमा के पर्यावरणविद इंद्रजीत सामंता ने फरवरी 2018 में उच्च न्यायालय रांची में जनहित याचिका दायर किये थे सामंता का दावा था कि वन विभाग बिना किसी तैयारी के पेड़ो की कटाई के साथ ट्रांसप्लांटेशन कर रहा है। ऐसे में यह पूरी तरहा कारगर नहीं होगा इस नयी याचिका के बाद वन विभाग की पावर कमिटि ने मई 2019 को कोर्ट में अपनी रिपोर्ट सौपी अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि एनएच के 34 प्रस्ताव में कार्य के दौरान 62187 पेड़ काटे गये, जबकि 20990 पेड़ ट्रांसप्लांट किये गये साथ ही क्षतिपूर्ती के रूप में 2,84,960 पौधे लगाये गये है। यह कार्य 31 अगस्त 2016 से 8 मई 2019 के बीच किया गया है।
बरही से कोडरमा के फोरलाइन निर्माण में तकरीबन 5491 पेड़ काटे जायेगे फोरलेन निर्माण में हजारीबाग वन प्रमंडल के तहत बरही क्षेत्र में 12.362 हेक्टेयर तथा कोडरमा क्षेत्र में 3.782 हेक्टेयर वन भूमी जा रही है जिसमें जवाहर घाटी स्थित पहाड़ी क्षेत्र को काफी क्षति पहुंचने वाली है। सड़क चौड़ीकरण में हजारीबाग क्षेत्र के करीब 6352 पेड़ प्रभावित हो रहे है। इसमें 1910 काटे जायेगे और 4442 ट्रांसप्लांट करना है। इसी तरहा कोडरमा क्षेत्र में 5340 प्रभावित होने वाले पेड़ में से 3581 काटे जायेगे 1723 पेड़ ट्रांसप्लांट किया जाना है। वन विभाग का दावा है कि 60 हेक्टेयर में पौधे लगाये जायेगे और आठ बडे चेक डैम बनाया जायेगा जिससे कटने वाले पेड़ से होने वाली छती के प्रभाव को कम किया जायेगा
