Koderma News : उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में कार्यालय प्रधानों और प्रधान लिपिकों को सरकारी खरीद प्रक्रिया, ई-प्रोक्योरमेंट, GeM पोर्टल और वित्तीय नियमों की विस्तृत जानकारी दी गई।
Koderma News : कोडरमा में आयोजित वस्तु एवं सेवा क्रय (Procurement of Goods and Services) प्रशिक्षण कार्यक्रम में सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और वित्तीय नियमों के अनुरूप बनाने पर बल दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को GFR-2017, झारखंड वस्तु एवं सेवा क्रय नियमावली-2024 और ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। Koderma Newsकोडरमा में आयोजित वस्तु एवं सेवा क्रय (Procurement of Goods and Services) प्रशिक्षण कार्यक्रम में सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और वित्तीय नियमों के अनुरूप बनाने पर बल दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को GFR-2017, झारखंड वस्तु एवं सेवा क्रय नियमावली-2024 और ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
कोडरमा। सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और वित्तीय नियमों के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से कोडरमा जिला प्रशासन की ओर से एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित इस एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विभागों के कार्यालय प्रधानों एवं प्रधान लिपिकों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का विषय “वस्तु एवं सेवा क्रय (Procurement of Goods and Services)” था, जिसमें सरकारी खरीद से जुड़े नियमों, प्रक्रियाओं और नवीन प्रावधानों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सरकारी विभागों में होने वाली वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और वित्तीय नियमों के अनुरूप बनाना था। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों को यह बताया गया कि सार्वजनिक धन का उपयोग अत्यंत जिम्मेदारी और नियमों के तहत किया जाना चाहिए ताकि सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ समय पर आम लोगों तक पहुंच सके।
प्रशिक्षण सत्र में सामान्य वित्तीय नियम (GFR-2017), बिहार वित्तीय नियम, झारखंड वस्तु एवं सेवा क्रय नियमावली-2024 तथा प्रस्तावित झारखंड वित्तीय नियमों के विभिन्न महत्वपूर्ण प्रावधानों की विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को सरकारी खरीद प्रक्रिया के प्रत्येक चरण की जानकारी दी और बताया कि किस प्रकार नियमों का पालन करते हुए गुणवत्ता युक्त वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीद सुनिश्चित की जा सकती है।
कार्यक्रम में निविदा आमंत्रण प्रक्रिया, ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली, सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के उपयोग, दर अनुबंध, मूल्यांकन प्रक्रिया तथा ई-रिवर्स ऑक्शन जैसी व्यवस्थाओं पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया। अधिकारियों को बताया गया कि वर्तमान समय में अधिकांश सरकारी खरीद प्रक्रियाएं डिजिटल माध्यम से संचालित की जा रही हैं, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार की संभावनाओं में कमी आई है।
प्रशिक्षण में गुणवत्ता एवं लागत आधारित चयन (QCBS) प्रणाली, प्रदर्शन सुरक्षा (Performance Security), अनुबंध निष्पादन और ब्लैकलिस्टिंग से संबंधित प्रावधानों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि किसी भी सरकारी खरीद में गुणवत्ता और लागत के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है ताकि सार्वजनिक धन का उचित उपयोग सुनिश्चित हो सके।
इस दौरान यह स्पष्ट किया गया कि प्रत्येक सरकारी खरीद वास्तविक सार्वजनिक आवश्यकता, स्वीकृत बजट और सक्षम प्राधिकारी की प्रशासनिक स्वीकृति के आधार पर ही की जानी चाहिए। बिना स्वीकृत बजट या प्रशासनिक मंजूरी के किसी भी प्रकार की खरीद वित्तीय नियमों का उल्लंघन मानी जा सकती है। अधिकारियों ने कहा कि सरकारी खरीद में पारदर्शिता, निष्पक्षता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी है।

प्रधान लिपिकों एवं कार्यालय प्रधानों को विशेष रूप से निर्देशित किया गया कि किसी भी क्रय संचिका को अग्रेषित करने अथवा भुगतान की अनुशंसा करने से पूर्व सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच अवश्य करें। इनमें प्रशासनिक स्वीकृति, बजटीय प्रावधान, GeM पोर्टल पर वस्तु उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में आवश्यक प्रमाण-पत्र तथा क्रय एवं मूल्यांकन समिति द्वारा हस्ताक्षरित तुलनात्मक विवरणी का संलग्न होना अनिवार्य बताया गया।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि इन आवश्यक दस्तावेजों का अभाव पाया जाता है तो संबंधित खरीद प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप नहीं माना जाएगा। इसलिए प्रत्येक स्तर पर दस्तावेजों की जांच और सत्यापन अत्यंत आवश्यक है। इससे न केवल वित्तीय अनियमितताओं को रोका जा सकेगा बल्कि सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और विश्वास भी बढ़ेगा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों का समाधान भी किया गया। व्यावहारिक उदाहरणों और वास्तविक परिस्थितियों के माध्यम से नियमों को समझाया गया ताकि अधिकारी और कर्मचारी उन्हें अपने दैनिक कार्यों में प्रभावी ढंग से लागू कर सकें। इस संवादात्मक सत्र से प्रतिभागियों को खरीद प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिला।
उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता ने प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरकारी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी का उपयोग करते हुए सभी खरीद प्रक्रियाओं को नियमों के अनुरूप संचालित करें और किसी भी प्रकार की त्रुटि या अनियमितता से बचें।

उन्होंने कहा कि वित्तीय अनुशासन और पारदर्शी व्यवस्था ही सुशासन की आधारशिला है। यदि सभी अधिकारी निर्धारित नियमों का पालन करेंगे तो सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आएगी और आम जनता को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
इस अवसर पर वन प्रमंडल पदाधिकारी सौमित्र शुक्ला, उप विकास आयुक्त रवि जैन, अपर समाहर्ता संजय पीएम कूजूर, सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी अस्मिता सिंह, कोषागार पदाधिकारी नजमुल लैल, जिला योजना पदाधिकारी अनूप कुजूर सहित विभिन्न विभागों के कार्यालय प्रधान एवं प्रधान लिपिक उपस्थित रहे।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे अधिकारियों और कर्मचारियों की क्षमता में वृद्धि होगी तथा जिले में वित्तीय नियमों के बेहतर अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा।