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WhatsApp Image 2020-02-01 at 2.20.59 PMकोडरमा जिला किसी पहचान का मोहताज नहीं है. अभ्रक नगरी के नाम से मशहूर कोडरमा पुरे देश सहित विश्व भर में अपने अभ्रक उत्पादन के लिए जाना जाता है. इसी शहर में सरकार के द्वारा चल रहा पॉलिटेक्निक महाविद्यालय है जहाँ काई विद्यार्थी तकनिकी शिक्षा प्राप्त करते है. विडंबना ऐसी है की कई छात्र तकनिकी शिक्षा प्राप्त तो कर रहे है लेकिन रोजगार का कोई साधन सरकार उपलब्ध नहीं करवा रही है.

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राजकीय पॉलिटेक्निक कोडरमा का शाखा ड्रिलिंग टेक्नोलॉजी के छात्रों का कहना है की राजकीय पॉलिटेक्निक कोडरमा पुरे झारखण्ड में एकमात्र ऐसा महाविद्यालय है जहाँ ड्रिलिंग टेक्नोलॉजी की पढ़ी होती थी जिसे पूर्व की रघुवर सरकार के द्वारा बंद करवा दिया गाया है साथ ही पिछले 19 सालो से राज्य सरकार के द्वारा हमारे लिए कोई नियुक्ति नहीं निकली गयी है. पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और पूर्व के कई मंत्रियो के पास बार-बार फरियाद लगाने के बाद भी हमारी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया.

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छात्रों ने कहा की हमें केंद्रीय भूमि जल बोर्ड,रांची से भी प्रशिक्षण प्राप्त है बावजूद इसके जल संसाधन में निकाली गयी नियुक्तिओं को पूर्व की रघुवर सरकार ने बाहरी लोगो को इन पदों पर नियुक्त किया है जिनका ड्रिलिंग से कोई सम्बन्ध नहीं है.

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छात्रों ने सीएम हेमंत सोरेन से की नियुक्ति प्रक्रिया को शुरू करने की मांग:

राजकीय पॉलिटेक्निक कोडरमा ड्रिलिंग शाखा के छात्रों ने 9 जनवरी को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर नियुक्ति प्रक्रिया को चालू करने और स्थानीय छात्रों को प्राथमिकता देने की गुहार लगायी है. छात्रों का एक प्रतिनिधि ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर कहा की हमारे जैसे लगभग 1200 छात्र है जो ड्रिलिंग की पढ़ाई करने के बाद भी बेरोजगार है. रोजगार की तलाश में हमें पलायन करना पड़ता है जहाँ दूसरे राज्यों में हमें मजदूरों की तरहा 3500 रुपये महीने के वेतन पर काम करवाया जाता है. जबकि राजस्थान की कुछ कंपनियों में 7200 वेतन दिया जाता है.

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छात्रों ने आगे कहा की झारखण्ड में पीएचडी, डीएमजी तथा अन्य विभागों में जो नियुक्तियां निकलती है उनमे ड्रिलिंग के छात्रों की जगह सिविल मैकेनिकल के छात्रों नियुक्त किया जाता है. इस कारण से हम रोजगार से दूर है और हमारा भविष्य अंधकार की और है. युवाओ के लिए हेमंत सरकार जिस प्रकार से ढृढ़ संकल्प हो कर निर्णय लेने की बात कर रही है उससे हमें एक उम्मीद की किरण नजर आयी है. छात्रों ने मुख्यमंत्री को एक आवेदन पत्र सौपते हुए कहा की हमें आशा है की मुख्यमंत्री जी इस पर पहल करेंगे और जल ही कोई निर्णय लेंगे छात्रों ने यह भी मांग किया की पीएचडी जैसे विभागों में जल नियुक्ति निकल कर रिक्त पदों को भरा जाये और उसमें ड्रिलिंग के छात्रों को स्वीकार करने की सरतो के साथ निकला जाये।

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