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झारखंड के पूर्व प्रभारी डीजीपी एमवी राव जल्द ले सकते हैं वीआरएस, बोले- खुली हवा में सांस लेना चाहता हूं

Shah Ahmad
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झारखंड के पूर्व प्रभारी डीजीपी रहे एमवी राव अब पुलिस की सेवा में रहने को लेकर मूड में नहीं है. उन्होंने यह कहा है कि वे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने की सोच रहे हैं. राव ने यह भी कहा है कि वे खुले आसमान में सांस लेना चाहते हैं ना कि किसी राजनीतिक दबाव में काम करना चाहते हैं.

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एमवी राव झारखंड कैडर के 1987 बैच के अधिकारी हैं. जिनके नाम उपलब्धियों की लंबी लिस्ट है. एमवी राव को अपने बेबाक अंदाज के चलते उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान कई आलोचनाएं भी झेलनी पड़ी है. वे इसी वर्ष सितंबर में रिटायर होने वाले थे इसके पहले ही उन्हें डीजीपी के पद से हटा दिया गया. जिसके चलते एमवी राव मायूस हो गए हैं. संभावना जताई जा रही है कि एमवी राव जल्दी वीआरएस लेने की घोषणा कर सकते हैं.

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बता दें कि विगत वर्ष 2020 में 15 मार्च को एमवी राव झारखंड के प्रभारी डीजीपी के रूप में नियुक्त हुए थे. उन्होंने इस पद पर 11 महीने का कार्यकाल पूरा किया 12 फरवरी 2021 को उन्होंने नए डीजीपी नीरज सिन्हा को डीजीपी का पदभार दे दिया है. सीएम हेमंत सोरेन के काफिले पर हुए हमले को लेकर डीजीपी के द्वारा दिए गए बयान पर भी झारखंड की मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने उनकी खूब आलोचना की थी. प्रभारी डीजीपी के रूप से हटाए जाने के बाद भी गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने उन पर तंज कसते हुए उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा था की आयरन हैंड का क्या हुआ?

रघुवर सरकार में एडीजी सीआईडी बने थे एमवी राव, बकोरिया जांच की फाइल खोलने के बाद पद से हटाए गए थे:

पूर्व की भारतीय जनता पार्टी और रघुवर दास सरकार में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटने के बाद एमवी राव को 13 नवंबर 2017 को एडीजी सीआईडी बनाया गया था. उन्होंने एडीजी बनते ही सभी गड़े मुर्दे उखाड़ना शुरू कर दिए. बहुचर्चित बकोरिया मुठभेड़ की जांच भी तेज कर दी गई थी जिसके बाद वह राजनीति का शिकार हो गए और उन्हें 1 महीने के भीतर ही एडीजी सीआईडी के पद से हटाते हुए दिल्ली फिर से भेज दिया गया था. लेकिन राज्य में सरकार बदलते ही हेमंत सोरेन ने उन्हें झारखंड डीजीपी के प्रभारी के रूप में नियुक्त कर दिया. उनके नियुक्ति के बाद ही कोरोनावायरस महामारी ने पूरे प्रदेश को जकड़ लिया इस बीच झारखंड पुलिस का नेतृत्व कर रहे एमवी राव ने मानवता की मिसाल को कायम करते हुए उन्होंने सभी थानों को यह निर्देश दिया कि प्रत्येक दिन वहां भोजन की व्यवस्था होगी ताकि आम जनों को समय पर भोजन मिल सके और कोई भी भूखा ना रहे. 

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