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CM सोरेन के आग्रह पर, झारखंड के 1200 मजदूरों के जत्थे के साथ हैदराबाद से रवाना हुई ट्रेन, देर रात पहुंचेगा हटिया

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रेल मंत्रालय ने शुक्रवार को तेलंगाना से झारखंड में फंसे प्रवासियों के लिए पहली विशेष ट्रेन की शुरुआत की है. रेल मंत्रालय ने कहा की कि तेलंगाना सरकार के अनुरोध पर एक “एक विशेष ट्रेन” चलाई गई है. बता दें की झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रेल मंत्री पियूष गोयल से कहा था की देर के राज्यों में फंसे मजदूरों पर छात्रों को लाने के लिए विशेष ट्रेन चलाया जाये। जिसके बाद रेल मंत्रालय ने दोनों राज्यों की सहमति से यात्रियों के पहले जत्थे को रवाना किया है जो देर रात हटिया स्टेशन पहुंचेगी।

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रेलवे सुरक्षा बल के महानिदेशक अरुण कुमार ने कहा “ट्रेन के 24 डिब्बों में लगभग 1,200 प्रवासियों को झारखण्ड भेजा जा रहा है. यह ट्रेन तेलंगाना के लिंगमपल्ली से झारखंड के हटिया जा रही है. उन्होंने कहा कि ऐसी और ट्रेनों को चलने पर फैसला शुक्रवार को किया जा सकता है. यात्रियों की पूर्व जांच, (और) स्टेशन पर और ट्रेन में सामाजिक दूरी बनाए रखने जैसी सभी आवश्यक सावधानियों का पालन किया गया है।

कोरोनोवायरस रोग (कोविद -19) के प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण देशभर में फंसे प्रवासियों और छात्रों के लिए विशेष ट्रेनों की तैनाती के लिए केंद्र पर राज्यों का दबाव रहा है। प्रवासियों की अंतरराज्यीय यात्रा के लिए गृह मंत्रालय के दिशानिर्देश। छात्र और अन्य लोग सड़क पर, बसों द्वारा आवागमन की अनुमति देते हैं।

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राजस्थान, महाराष्ट्र, झारखंड और केरल जैसे गैर भाजपा शासित राज्यों ने केंद्र से विशेष ट्रेन चलाने को कहा है। तो वही बिहार में जहां भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड) सत्तारूढ़ गठबंधन में हैं। उन्होंने भी ऐसी ही मांग की है. बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने गुरुवार को ट्वीट किया, “मैं भारत सरकार से अपील करता हूं कि वे विशेष ट्रेनों को दूर स्थानों से प्रवासियों को लाने की अनुमति दें।

22 मार्च से यात्री ट्रेनों को लॉकडाउन की वजह से बंद कर दिया गया है. केंद्र ने आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए माल और विशेष पार्सल गाड़ियों की अनुमति दी है। केंद्र ने राष्ट्रीय सुरक्षा विचार का हवाला देते हुए भारतीय सेना के जवानों के लिए भी विशेष ट्रेनें चलाने की अनुमति दी। 17 अप्रैल से सैन्य विशेष गाड़ियों को तैनात किया गया है।

राज्यो के अनुमान के अनुसार, देश भर में लगभग 10 मिलियन प्रवासी मजदूर फंसे हुए हैं। अकेले इन श्रमिकों के परिवहन के लिए 500,000 बसों की आवश्यकता होगी।

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