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नवरात्र में भी प्याज़ का भाव 80 पार, कोरोना में आम जनता पर मंहगाई की मार

News Desk
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भारत में सनातन धर्म को मानने वाले लोग नवरात्रि के दौरान प्याज़ का सेवन नहीं करते हैं. खरीदारी कम होने की वज़ह से बाजार में प्याज़ की मांग भी कम रहती है. इस वजह से प्याज़ के दामों में भारी गिरावट देखने को मिलती है. परन्तु इसबार मामला उलट है. झारखंड के धनबाद जिलें के बाजारों में प्याज 80 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। प्याज के साथ ही आलू के दामों में भी बढ़ोतरी दिख रहा है। नया आलू 60 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।

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बात अगर धनबाद के सब्जी बाजार की करे तो आलू-प्याज के अलावा टमाटर भी 60 रुपये किलो, हरी मिर्च 100 रुपये किलो बिक रही है।वहीं अन्य सब्जियां भी महंगी हो गई हैं। कृषि बाजार समिति में आलू-प्याज का थोक कारोबार करने वालो का कहना है कि दक्षिण भारत और महाराष्ट्र में प्याज की फसल खराब होने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। कर्नाटक, आंघ्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के नासिक से धनबाद में प्याज पहुंचती है। इन राज्यों में हुई भारी बारिश ने प्याज गोदाम में रखे और खेतों में लगी नई फसल को बर्बाद कर दिया है. नई फसल दिसंबर में आएगी तब तक लोगों को महंगी प्याज ही खानी पड़ेगी।

आलू प्याज के अलावा अन्य सब्जियों के दाम में आयी तेजी आम लोगों के लिए मुश्किलें पैदा कर रही है। आने वाले दीवाली तक प्याज की दर एक सौ रुपये किलो तक जाने की संभावना है। प्याज 80 रूपये प्रति किलो बिक रहा है, जबकि नया आलू 60 रूपये के आसपास है। ऐसे में घर के भोजन से प्याज नदारद हो रहा है।

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