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झारखंड के बोकारो में पुलिस की बर्बरता आई सामने, पुलिस हिरासत में मुस्लिम जोड़े को प्रताड़ित किया गया Bokaro News

Shah Ahmad

Bokaro News: झारखंड के बोकारो जिले में पुलिस कि बर्बरता सामने आई है. जिले के बालीडीह थाना क्षेत्र थाना प्रभारी पर आरोप है कि जानबूझ कर एक मुस्लिम दंपति को प्रताड़ित किया जा रहा है.

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दरअसल, बालीडीह थाना क्षेत्र में एक घर में हुई चोरी के मामले में पुलिस ने पूछताछ के लिए थाने बुलाए गए एक शिक्षक को अमानवीय यातनाएं दी हैं। आरोप है कि थाना प्रभारी नूतन मोदी ने पूछताछ के दौरान जबरन आरोप कबूल करने के लिए अमानत हुसैन नाम के व्यक्ति को प्रताड़ित किया। पैर के नाखून तक उखाड़ दिए और जमकर मारपीट की है। अमानत पेशे से एक शिक्षक हैं. वह इलाके में निजी स्कूल चलाकर बच्चों को पढ़ाते हैं। मामला 30 दिसंबर 2021 का है वहीं 1 जनवरी 2022 को मामले में पुलिस अधीक्षक बोकारो के समक्ष थाना प्रभारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई। मामला सामने आने के बाद अब तक थाना प्रभारी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पुलिस की ओर से बताया गया है कि बोकारो SP चंदन कुमार झा ने मुख्यालय DSP मुकेश कुमार को मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

पीड़ित अमानत हुसैन का कहना है कि वह मखदुमपुर के रहने वाले है। पड़ोसी युनूस हाशमी के घर के सदस्य इलाज के लिए दिल्ली गए। पड़ोसी होने के नाते उन्हें घर की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा। वहां वह रात को जाकर सो रहे थे। एक दिन तबीयत खराब हो गई। जिसके कारण वहां सोने नहीं जा सके। उसी रात घर में चोरी हो गई। इसकी शिकायत घर वालों ने बालीडीह पुलिस थाने में की। जहां पूछताछ के लिए बालीडीह थाना प्रभारी नूतन मोदी के द्वारा फोन कर पीड़ित को थाने बुलाया गया। थाने में ही पूछताछ के दौरान अमानत हुसैन की अमानवीय तरीके से पिटाई की गई। उसके पैर के अंगूठे का नाखून उखाड़ दिया गया। पीड़ित को स्थानीय दो मुखियाओं के द्वारा PR बांड से रिहा कराकर घर लाया गया था।

मामलें को लेकर सोशल मीडिया पर भी लोगो ने पुलिस कि कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री और मंत्रियों से कार्रवाई कि मांग कर करने लगे. झारखंड के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री हफ़िजुल हसन अंसारी तक जब मामला पहुंचा तो उन्होंने संज्ञान लेते हुए बोकारो पुलिस को मामलें कि पूरी जाँच करते हुए कार्रवाई करने कि बात कही है.

पीड़ित परिवार का कहना है कि थाना प्रभारी पर राजनीतिक संरक्षण होने के कारण कार्रवाई नहीं हो रही। वह झारखंड सरकार में बड़े पद पर बैठे व्यक्ति की करीबी बताती हैं। यही कारण हैं कि अपनी सेवा के दौरान थाना प्रभारी को सबसे अधिक बोकारो जिले में ही पदस्थापना मिली। दूसरे जिलों में भेजे जाने के कुछ समय बाद उन्हें फिर बोकारो बुला लिया गया।

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