सईद नसीम का मोदी सरकार पर तंज कहा- इस बजट में सरकार जो न बेच पायी वो अगले बजट में बेचेगी

Shah Ahmad
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मोदी (2.0) सरकार का बजट जनता के सामने आ चूका है बतौर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन का ये दूसरा बजट था. इस बजट सत्र में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम बजट सत्र के दौरान सबसे लम्बा भाषण देने का रिकॉर्ड दर्ज हुआ, लेकिन देश भर में विपक्ष ने बजट पर केंद्र सरकार सहित वित्त मंत्री को जमकर घेरा है. कोडरमा से कांग्रेस नेता सईद नसीम ने भी बजट को दिशाहीन और जुमलेबाजी करार दिया है.

सईद नसीम ने प्रेस विज्ञाप्ती जारी कर कहा की यह नए साल और दशक में पहला संसदीय सत्र था और एक उज्ज्वल दशक के लिए एक मजबूत नींव रखी जानी चाहिए थी साथ बजट से आमजन की उम्मीदें थी. सदनों में आर्थिक मुद्दों और लोगों के सशक्तिकरण पर नई पहल ले कर सरकार आएगी जनता ने ऐसी उम्मीद लगा राखी थी लेकिन उन्हें मायूस होना पड़ा है। कुल मिलाकर पिछले छह सालो द्वारा जो आमजनो को ठगने का काम केंद्र सरकार करती आई है। उसे दोहराने का कार्य किया गया है जो देश के बेरोजगारों, किसानों, मजदूरों, छात्रों ,मध्यवर्गीय परिवारों की चिंता को बढ़ा कर रख दिया है।

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पिछले कुछ बजट की बात से करे तो केंद्र सरकार द्वारा वादा किया गया था 100 स्मार्ट सिटी,हर वर्ष 2 करोड़ रोजगार,पेट्रोल-डीजल सस्ता,LPG सस्ता, आदि कई चीजें थी जिसे अब तक उन वादों को केंद्र सरकार अब तक पूरा नही कर पायी है। सरकार की प्राथमिकता किसानों की आय में वृद्धि, युवाओं के लिए रोजगार और गांवों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार का प्रमुखता होनी चाहिए थी। लेकिन आयुष्मान भारत अदृश्य हो गया ,कोई अलग आवंटन बजट में नहीं होना इस बात का प्रमाण है। 2018 में लाई गई प्रोजेक्ट भारतमाला अदृश्य, एनएचआई कर्ज के बोझ से दबी हुई है। सरकारी उपक्रम कंगाल हो चुकी सरकार बेचती जा रही है।

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व्यक्तिगत आयकर में छूट मध्यवर्ग को एक व डिपॉजिट इंश्योरेंस कवरेज 1 लाख से बढ़कर 5 लाख राहत भरी महसूस हो ही रहे थे कि ये राहत तब आमजनो को झटके दे दिए जब करोडो भारतीय परिवारों ने ये सोचकर LIC में पैसा लगाया कि सब ख़त्म हो जाएगा, तब भी LIC बचेगा। सरकार ने इस बजट में LIC को बेचने की शुरुआत कर दी है। ऐसा मालूम होता है जो इस बजट में सरकार नहीं बेच सकी वो अगले बजट में बेचेगी। बेरोजगारी की वजह से सिर्फ एक साल में 26 हजार से ज्यादा बेरोजगार आत्महत्या कर चुके हैं। इसके बाद भी रोजगार के दिशा में ठोस कदम सरकार के द्वारा नही उठाया जाना निराशजनक है। कुल मिलाकर बजट से आमजन पूर्व से मंहगाई बेरोजगारी मंहगी शिक्षा आदि की मार झेलने वालो को निराश व हताश होना पड़ा है।

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