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झारखंड में भाषा पर छिड़ी सियासी घमासान के बीच सीता सोरेन (Sita Soren) बोली “जो हमारा है वो सर्वप्रथम है”

Arti Agarwal
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Sita Soren: भोजपुरी और मगही भाषा बोलने  वाले लोगों को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के द्वारा दिए गए बयान को लेकर बवाल मच गया है. मुख्यमंत्री के बयान पर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने मुख्यमंत्री पर हमला बोला है वही मामले को शांत करने के लिए सत्तापक्ष को सफाई देनी पड़ रही है.

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झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र से पहले सरकार ने कैबिनेट की बैठक में एक अहम फैसला लेते हुए JSSC  की परीक्षा संचालन नियमावली में कई बदलाव किए थे इन बदलावों में सबसे महत्वपूर्ण भाषा रही जिस पर लगातार सियासी बवाल मचा हुआ है. कैबिनेट में लिए गए फैसले के अनुसार हिंदी और अंग्रेजी को सिर्फ क्वालीफाइंग भाषा में शामिल किया गया है वहीं भोजपुरी और मगही भाषा को झारखंड के जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं की सूची से बाहर कर दिया गया है. जिसके बाद झारखंड के इलाकों में रहने वाले भोजपुरी और मगही बोलने वाले लोगों के द्वारा इन भाषाओं को परीक्षा संचालन नियमावली में शामिल करने की मांग की जा रही है.

सरकार में मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने भी इन भाषाओं को अन्य भाषाओं की तरह शामिल करने की मांग की है परंतु कैबिनेट की बैठक में जिन भाषाओं पर मुहर लगाई गई है उसे अंतिम फैसला करार देने की कोशिश झारखंड के कई विधायक और सत्ता में शामिल राजनीतिक पार्टियां कर रही है बावजूद इन सबके भारतीय जनता पार्टी भोजपुरी मगही और अंगिका को इस सूची में शामिल करने को लेकर लगातार सत्ता पक्ष पर हमलावर है वहीं कांग्रेस पार्टी के नवनियुक्त अध्यक्ष राजेश ठाकुर भी भारतीय जनता पार्टी की तरह ही भाषाओं को शामिल करने पर सरकार को विचार करने की सलाह दे रहे हैं.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक निजी चैनल में दिए गए इंटरव्यू में यह कहा था कि भोजपुरी और मगही बोलने वाले लोगों के द्वारा झारखंड अलग आंदोलन के वक्त इन भाषाओं में राज्य की महिलाओं को गलियाँ दी जाती थी. पडोसी राज्य बिहार में भोजपुरी को प्रथम भाषा का दर्जा प्राप्त नहीं है फिर झारखंड में इसे प्रमुख भाषाओं में शामिल करने की बात ही नहीं की जानी चाहिए.

भाषा पर छिड़ी सियासत के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा कि विधायक और मुख्यमंत्री की बड़ी भाभी सीता सोरेन भी मैदान में कूद चुकी है. सीता सोरेन ने बिना किसी का नाम लिए अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर कहा है कि “जिस प्रदेश को अपनी भाषा और साहित्य के गौरव का अनुभव नहीं है, वह उन्नत नहीं हो सकता है. हर प्रदेश की अपनी एक अलग परम्परा, रीतिरिवाज़, संस्कृति और भाषा होती है जो उसे बाकियों से अलग करती है. यही राज्य की मुख्य पहचान होती है. सभी भाषाओं का सम्मान है लेकिन जो हमारा है वो सर्वप्रथम है.”

सीता सोरेन ने बिना किसी का नाम लिए दबे जुबान में यह साफ कर दिया है कि उनका और उनकी पार्टी का स्टैंड साफ है कि भोजपुरी, मगही और अंगिका को झारखंड की क्षेत्रीय भाषाओं का दर्जा नहीं दिया जाएगा. मालूम हो कि विधायक सीता सोरेन लगातार देश की आदिवासी और अन्य मुद्दों पर प्रखर होकर अपनी बात रखती है. लाजिमी है कि सीता सोरेन के द्वारा कहे गए इन बातों के बाद पार्टी के अन्य विधायक भी खुलकर सामने आएंगे और मुख्यमंत्री की हो रही आलोचनाओं पर जनता के सामने अपनी बातों को रखेंगे ताकि स्थिति को और स्पष्ट किया जा सके.

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