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राज्य सरकार को अस्थिर करने की सौगंध लेने वाली भाजपा CM हेमंत सोरेन के किले को नहीं भेद पा रहीं

Arti Agarwal

झारखंड विधानसभा: 29 दिसंबर 2019 के बाद से ही भाजपा विधायक शायद यह सौगंध खाकर बैठे हैं कि वे किसी भी हाल में हेमंत सोरेन सरकार के कार्यकाल में विधान सभा को नहीं चलने देंगे.वे कभी नहीं चाहते कि प्रदेश के सवा 3 करोड़ से अधिक की जनता के हित में लिए जाने वाले फ़ैसलों पर सर्वसम्मति बने. विधानसभा के अंदर भाजपा विधायक जहां हंगामा कर सदन को बाधित कर रहे हैं तो सदन के बाहर हेमंत सरकार को गिराने की साजिश भी शामिल है यह खबरें झारखंड के राजनीतिक गलियारों में बहुल चर्चित है और यह आरोप लग रहे हैं कि बीजेपी,

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कांग्रेस के विधायकों को पैसे से खरीद कर सरकार गिराना चाहती है. वहीं विधानसभा के चल रहे मानसून सत्र 2022 में कमोवेश पूर्व की भांति ही सदन बाधित करने का खेल चल रहा है जैसा कि पिछले ढाई सालों में दिखा. भाजपा विधायक बेवजह सदन को बाधित कर रहे हैं वैसे विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र नाथ महतो कई बार इस बात को दोहरा चुके हैं कि लोकतंत्र में हर पक्ष को अपना विरोध करने का अधिकार है. आप विरोध कीजिए. साथ ही देश के समक्ष यह मैसेज मत दीजिए कि प्रदेश के विधानसभा के अंदर विपक्ष क्या-क्या करते हैं.

अध्यक्ष के इस बात का भाजपा विधायकों के ऊपर शायद ही कोई असर दिखे यही कारण है कि भाजपा विधायक सीपी सिंह ने सारी मर्यादा तोड़ते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधानसभा अध्यक्ष पर अनर्गल आरोप लगा दिए.सीपी सिंह भी विधानसभा अध्यक्ष रहे हैं उन्हें पता है कि रिपोर्ट संसद तक जाती है: अध्यक्षभाजपा विधायकों के हो-हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र नाथ महतो ने विधायक सीपी सिंह से कहा, आप जानते हैं कि सदन के अंदर की सारी गतिविधि और कार्यवाही की रिपोर्ट संसद को जाती है. आप जिस तरह का हंगामा सदन में कर रहे हैं वह रिपोर्ट अगर संसद तक जाएगी. तो क्या संदेश जाएगा?

सिपी सिंह स्वयं विधानसभा अध्यक्ष के पद का दायित्व निभा चुके हैं लेकिन रविंद्र नाथ महतो के बयान को समझने के जगह भाजपा विधायक ने कहा दीया कि 2014-19 तक जब आप विपक्ष में थे. तब तो अध्यक्ष के समक्ष जूते-चप्पल तक फेंका गया. वही रिपोर्ट जब संसद तक गई तो आप विधानसभा अध्यक्ष और झामुमो नेता हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री बन गए.

भाजपा अभी तक भेद नहीं सके हेमंत का किलाविधानसभा 2019 के परिणाम आने के बाद से ही लगातार झारखंड के राजनीतिक गलियारों से यह खबर मिलती रही होगी कि हेमंत सरकार को अस्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है और यह आरोप प्रत्यारोप की बीज बीजेपी से ही जुड़ी होने की बात सामने आती रहती है बावजूद इसके हेमंत अपने सरकार को बचाने में सफल है यही कारण है कि लोग इन्हें “हेमंत है तो हिम्मत” के संबोधन से संबोधित करते हैं।

अध्यक्ष को झामुमो का एजेंडा बताया:

रणधीर सिंहअगर यही बात होती, तो माना जाता. लेकिन विधानसभा के अंदर के रिपोर्टिंग टेबल पर चढ़कर भाजपा विधायक हंगामा करने लगे. विधानसभा अध्यक्ष की तरफ पीठ दिखाने लगे. यह कृत्य पूरी तरह से सदन की गरिमा के विपरीत है। अध्यक्ष के बार-बार समझाने पर भी जब भाजपा विधायक नहीं माने तो, अध्यक्ष ने विपक्ष के चार विधायक को सस्पेंड कर दिया। लेकिन अपनी गलती की जगह सस्पेंड विधायक रणधीर सिंह ने तो विधानसभा अध्यक्ष को ही झामुमो का एजेंडा बता दिया। बयान देने से पहले रणधीर सिंह यह नहीं समझे कि विधानसभा अध्यक्ष का पद सभी दलों के ऊपर होता है।

झारखंड सरकार में कृषि मंत्री रह चुके हैं :

रणधीर सिंहलोगों का यह भी कहना है कि अध्यक्ष पर आरोप लगाकर रणधीर सिंह ने अपनी सोच को उजागर कर दिया। हालांकि रणधीर सिंह से और क्या उम्मीद भी की जा सकती है?किसानों के हित के लिए बात करने वाली भाजपा विधायक पूर्ववर्ती सरकार में कृषि मंत्री थे. तब उन्होंने किसानों को उन्नत तकनीकी सिखाने के नाम पर किसानों की जगह अपने कार्यकर्ताओं को इजराइल का दौरा करा दिया। वैसे विधायक से और क्या उम्मीद भी की जा सकती है?

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