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World Day Against Child Labour : कोडरमा में छात्राओं को बाल अधिकारों और बाल श्रम के खिलाफ किया गया जागरूक

Megha Sinha

World Day Against Child Labour : पीएम श्री परियोजना बालिका प्लस-टू उच्च विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में छात्राओं को बाल श्रम के दुष्परिणाम, बाल अधिकारों और सरकारी योजनाओं की दी गई जानकारी

World Day Against Child Labour : विश्व बाल श्रम उन्मूलन दिवस के अवसर पर कोडरमा के पीएम श्री परियोजना बालिका प्लस-टू उच्च विद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं को बाल श्रम उन्मूलन, बाल अधिकारों, बाल संरक्षण कानूनों और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर जोर दिया।

विश्व बाल श्रम उन्मूलन दिवस पर कोडरमा में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

कोडरमा जिले में विश्व बाल श्रम उन्मूलन दिवस के अवसर पर पीएम श्री परियोजना बालिका प्लस-टू उच्च विद्यालय में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को बाल श्रम जैसी गंभीर सामाजिक समस्या के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें उनके अधिकारों और सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करना था।

कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को बताया गया कि बाल श्रम न केवल बच्चों के बचपन को छीन लेता है, बल्कि उनके शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। वक्ताओं ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा प्राप्त करने, सुरक्षित वातावरण में रहने और सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार है। ऐसे में बाल श्रम जैसी कुप्रथा को समाप्त करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

बाल श्रम कानूनन अपराध, शिक्षा है हर बच्चे का अधिकार

कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों ने छात्राओं को बताया कि भारत में बाल श्रम निषेध और विनियमन अधिनियम के तहत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों से खतरनाक और जोखिमपूर्ण कार्य कराना कानूनन अपराध है। बच्चों का स्थान कारखानों, होटलों या अन्य कार्यस्थलों पर नहीं, बल्कि विद्यालयों में है।

वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत नींव है। सरकार द्वारा बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और संरक्षण के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। छात्राओं को इन योजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए उनसे जुड़ने की प्रक्रिया भी समझाई गई।

बाल अधिकारों और संरक्षण कानूनों की दी गई जानकारी

जागरूकता कार्यक्रम में बाल अधिकारों, बाल संरक्षण कानूनों और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। छात्राओं को बताया गया कि यदि कोई बच्चा शोषण, उत्पीड़न, बाल विवाह, बाल मजदूरी या किसी अन्य प्रकार की समस्या का सामना कर रहा है, तो उसकी सहायता के लिए कई सरकारी तंत्र सक्रिय हैं।

वक्ताओं ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण प्रदान करना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है।

चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के बारे में दी गई महत्वपूर्ण जानकारी

कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को टोल-फ्री चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 के बारे में भी जागरूक किया गया। बताया गया कि किसी भी संकट, शोषण, उत्पीड़न या बाल श्रम से संबंधित मामले में इस हेल्पलाइन पर संपर्क कर तत्काल सहायता प्राप्त की जा सकती है।

इसके अलावा जिला बाल संरक्षण इकाई और चाइल्ड हेल्पलाइन की सेवाओं के बारे में भी जानकारी दी गई। छात्राओं को समझाया गया कि यदि उनके आसपास कोई बच्चा बाल श्रम या किसी प्रकार के शोषण का शिकार हो रहा हो तो उसकी सूचना संबंधित विभागों तक पहुंचाना एक महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्व है।

विशिष्ट अतिथियों ने किया मार्गदर्शन

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सहायक निदेशक नीतीश कुमार निशांत उपस्थित रहे। उन्होंने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि बाल श्रम उन्मूलन के लिए समाज में जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब तक प्रत्येक बच्चा विद्यालय नहीं पहुंचेगा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त नहीं करेगा, तब तक बाल श्रम जैसी समस्या का पूर्ण समाधान संभव नहीं होगा।

विद्यालय के प्रधानाचार्य ओम प्रकाश ने छात्राओं को शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और समाज में सकारात्मक बदलाव की वाहक बनें।

इस अवसर पर अधिवक्ता हरिशंकर प्रसाद, मानवाधिकार कार्यकर्ता राम सिंह, वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासक अर्चना ज्वाला तथा शिल्पी कुमारी ने भी छात्राओं को बाल संरक्षण, महिला सुरक्षा, बाल अधिकार और कानूनी सहायता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान कीं।

बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण का लिया संकल्प

कार्यक्रम के अंत में छात्राओं को बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता फैलाने और समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि बाल श्रम मुक्त समाज का निर्माण तभी संभव है जब प्रत्येक नागरिक इस दिशा में अपनी जिम्मेदारी निभाए।

विश्व बाल श्रम उन्मूलन दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम छात्राओं के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक साबित हुआ। इससे न केवल बाल अधिकारों के प्रति उनकी समझ बढ़ी, बल्कि उन्हें समाज में जागरूक नागरिक के रूप में अपनी भूमिका निभाने की प्रेरणा भी मिली।