JPSC – JSSC Protest : जेएलकेएम विधायक जयराम महतो ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जारी छात्र आंदोलन के समर्थन में 24 घंटे का निर्जला उपवास शुरू किया। उन्होंने सरकार पर छात्रों की मांगों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए जल्द कार्रवाई की मांग की।
JPSC – JSSC Protest : झारखंड की राजनीति और छात्र आंदोलन के बीच रविवार को एक नया मोड़ तब आया, जब जेएलकेएम (झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा) के विधायक जयराम महतो ने आंदोलनकारी छात्रों के समर्थन में 24 घंटे का निर्जला उपवास शुरू कर दिया। उन्होंने सुबह 6:50 बजे पुराने विधानसभा परिसर में अपना उपवास आरंभ किया। इस दौरान उन्होंने घोषणा की कि वह पूरे 24 घंटे तक न तो अन्न ग्रहण करेंगे और न ही पानी पीएंगे। उनका कहना है कि यह उपवास केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि छात्रों की आवाज को सरकार तक मजबूती से पहुंचाने का प्रयास है।
जयराम महतो ने अपने उपवास की शुरुआत करते हुए कहा कि जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र पिछले 25 जुलाई से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे हैं, लेकिन अब तक राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस पहल या सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेने के बजाय उन्हें नजरअंदाज कर रही है।
उन्होंने कहा कि आंदोलन अब केवल झारखंड तक सीमित नहीं रह गया है। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों के जरिए छात्रों की आवाज देश और दुनिया तक पहुंच रही है, लेकिन विडंबना यह है कि राज्य सरकार तक उनकी पीड़ा और मांगें अब भी प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रही हैं। इसी कारण उन्होंने आंदोलन के समर्थन में एक दिवसीय निर्जला उपवास का निर्णय लिया है।
जयराम महतो ने कहा कि लोकतंत्र में जनता और छात्रों की आवाज को सुनना सरकार की जिम्मेदारी होती है। यदि छात्र लंबे समय तक सड़क पर बैठकर अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, तो सरकार को उनके साथ संवाद स्थापित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत ही इस पूरे विवाद का सबसे बेहतर समाधान हो सकता है।
विधायक ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का राजनीतिक लाभ लेना नहीं, बल्कि छात्रों की समस्याओं को प्राथमिकता दिलाना है। उन्होंने कहा कि अगर उनके इस उपवास से सरकार का ध्यान छात्रों की ओर जाता है और उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है, तो यह आंदोलन के लिए एक बड़ी सफलता होगी। लेकिन यदि सरकार फिर भी चुप रहती है, तो आंदोलन को आगे बढ़ाने की नई रणनीति तैयार की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों का संघर्ष पूरी तरह लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में चल रहा है। ऐसे में सरकार को उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए जल्द से जल्द वार्ता का रास्ता अपनाना चाहिए। उनका मानना है कि युवाओं की उम्मीदों और भविष्य से जुड़े मुद्दों को लंबे समय तक टालना राज्य के हित में नहीं होगा।
पुराने विधानसभा परिसर में शुरू हुए इस उपवास के दौरान बड़ी संख्या में समर्थक और छात्र संगठन के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। उन्होंने जयराम महतो के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों का इस तरह छात्रों के साथ खड़ा होना आंदोलन को नई ताकत देगा। समर्थकों ने इसे युवाओं के अधिकारों की लड़ाई बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
जयराम महतो ने कहा कि यदि सरकार समय रहते सकारात्मक पहल नहीं करती है, तो आंदोलन का स्वरूप और व्यापक हो सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उनका कहना है कि जब तक छात्रों की जायज मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
उन्होंने सरकार से अपील की कि वह आंदोलन को केवल विरोध के रूप में न देखे, बल्कि इसे युवाओं की वास्तविक चिंताओं और अपेक्षाओं के रूप में समझे। उन्होंने कहा कि झारखंड के छात्र राज्य के भविष्य की नींव हैं और उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जयराम महतो का यह निर्जला उपवास छात्र आंदोलन को नई राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में ला सकता है। इससे सरकार पर आंदोलनकारी छात्रों के साथ वार्ता करने का दबाव भी बढ़ सकता है। हालांकि, अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस उपवास और छात्रों की मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती है।
फिलहाल, जयराम महतो का 24 घंटे का निर्जला उपवास जारी है। उन्होंने दोहराया है कि यदि इस पहल से छात्रों की आवाज सरकार तक पहुंचती है और उनकी मांगों पर सार्थक कार्रवाई होती है, तो यह लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत होगी। वहीं, यदि कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकलता है, तो आंदोलन के अगले चरण की घोषणा की जाएगी और संघर्ष को और तेज किया जाएगा।









