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राजगीर दुनिया की सबसे खूबसूरत टूरिस्ट प्लेस और धार्मिक स्थल है

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भारत में बिहार राज्य के नालंदा जिले में राजगीर शहर है। इस शहर का इतिहास सदियों पुराना है। यह कभी मगध साम्राज्य की राजधानी हुआ करती था जिससे बाद में मौर्य साम्राज्य का उदय हुआ। राजगीर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। राजगीर बह्मा की पवित्र यज्ञ भूमि, संस्कृति और वैभव का केंद्र, जैन तीर्थकर महावीर और भगवान बुद्ध की साधनाभूमि रहा है। इसका जिक्र ऋग्वेद, अथर्ववेद, तैत्तिरीय पुराण, वायु पुराण, महाभारत, बाल्मीकि रामायण आदि में आता है। जैनग्रंथ विविध तीर्थकल्प के अनुसार राजगीर जरासंध, श्रेणिक, बिम्बसार, कनिक आदि प्रसिद्ध शासकों का निवास स्थान था। जरासंध ने यहीं श्रीकृष्ण को हराकर मथुरा से द्वारिका जाने को विवश किया था।

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धार्मिक स्थल पटना से लगभग 107 किमी और नालंदा से 19 किमी दूर राजगीर हिन्दू, जैन और बौद्ध तीनों धर्मो के धार्मिक स्थल हैं। खासकर बौद्ध धर्म से इसका बहुत प्राचीन संबंध है। बुद्ध न सिर्फ कई वर्षो तक यहां ठहरे थे, बल्कि कई महत्वपूर्ण उपदेश भी राजगीर की धरती पर दिए थे। बुद्ध के उपदेशों को यहीं लिपिबद्ध किया गया गया था और पहली बौद्ध संगीति भी यहीं हुई थी। राजगीर शांति और सौहार्द का स्तंभ है जो आज भी प्राचीनकाल के अवशेष से भरा पड़ा है। भगवान महावीर ने अपना प्रथम प्रवचन राजगीर के विपुलागिरि नामक स्थान पर प्रारंभ किया था।

राजगीर की पहाड़ी:

राजगीर पांच चट्टानी पहाड़ियों से घिरा है। जिसका जिक्र महाभारत और रामायण में भी मिलता है। राजगीर की पहाडि़यां विश्व में प्रसिद्ध है। राजगीर की पांच पहाड़ियों का नाम विपुलगिरि, रत्‍‌नागिरि, उदयगिरि, स्वर्णगिरि और वैभारगिरि हैं। पहाड़ों की प्राकृतिक सौंदर्य और हरे-भरे जंगलों के मनोरम दृश्यों को देखने पर्यटक देश-विदेश से आते हैं।अगर आप देश के किसी भी हिस्से में रहते हैं, अगर आप हनीमून मनाना चाहते हैं… दोस्तों के साथ मस्ती करना चाहते हैं या फिर एडवेंचर के शौकीन हैं तो यकीकन बिहार… जी हां बिहार आपके लिए एक बेहतरीन टूरिस्ट स्पॉट साबित होने जा रहा है। नालंदा के राजगीर में नेचर सफारी के साथ आपको विदेशों जैसा ग्लास ब्रिज भी मिलेगा, स्काई वॉक की कुल लम्बाई 85 फीट व चैडाई करीब 6 फीट है. घाटी से इसकी ऊंचाई करीब 250 फीट है. इस पर एक साथ 40 लोग जा सकेंगे, हालांकि डी सेक्टर यानी अंतिम छोर पर एक साथ 10 से 12 लोग ही जा सकेंगे.राजगीर के अति प्राचीन वैभार गिरी पर्वत के तलहटी में बनाए गए इस पुल में 15 एमएम के तीन लेयर के शीशे लगाए गए हैं. इसमें लगे शीशे की कुल मोटाई 45 एमएम है, जो पूरी तरह से पारदर्शी है, जिसके कारण इसपर चलना काफी रोमांचकारी भी होगा.

बताया जा रहा है कि इस पर चलने वाले लोग स्वयं को हवा में तैरता हुआ महसूस कर सकेगें. बता दें कि ऐसा ग्लास स्काई वॉक विश्व में सबसे पहले चीन के हेबई प्रांत में एस्ट तैहांग में बनाया गया था, जबकि देश में पहला ग्लास स्काई वॉक सिक्किम राज्य के पेलिंग में स्थित है। अब राजगीर नेचर सफारी में निर्मित यह ग्लास स्काई वॉक देश का दूसरा तथा बिहार का पहला स्काई वॉक होगा। हालांकि, जिन लोगों को ऊंचाई से डर लगता है, उन्हें ग्लास स्काई वॉक करने की अनुमति नहीं होगीइसके साथ ही यहां आने वाले पर्यटक जिप लाईन, एडवेंचर स्पॉट के तहत आर्चरी, तीरंदाजी, साईकलिंग, ट्रेकिंग पाथ, मड और ट्री कॉटेज, वुडेन हट, औषधीय पार्क का भी आनंद ले सकेंगे.पसंद लोगों के आकर्षण का केन्द्र होगा, तो वहीं नेचर सफारी प्राकृतिक दृश्य के बीच एडवेंचर स्पॉट बनेगा। नेचर सफारी में बिहार दर्शन का स्पॉट बन रहा है। जहां सूबे के सभी जिलों से संबंधित प्रतीक व ऐतिहासिक तथ्य दर्शाए जाएंगे। सभी प्रतीक पहाड़ की तलहटी के पत्थरों पर उकेरे जा रहे हैं।

झोपडिय़ां व देसी नस्ल की तितलियां खींचेंगी ध्यान

परिसर में मड हट यानी मिट्टी की झोपड़ी, ट्री हट यानी पेड़ों पर झोपड़ी, वुडेन हट यानी लकडिय़ों के कॉटेज भी बनाए जा रहे हैं। जिसमें तय शुल्क देकर पर्यटक ठहर सकेंगे। इसके अलावा ग्रास लैंड यानी घास का मैदान व मेडिसिनल यानी औषधीय गार्डेन भी होगा। जहां लोग तरह-तरह के औषधीय पौधे देख सकेंगे। नेचर सफारी में तितलियों की एवियरी भी होगी। जहां नालंदा में पाई जाने वाली तितलियों की प्रजातियां रखी जाएंगी। वैसे वाईल्ड लाइफ जू सफारी में भी तितलियों की एवियरी बनाई जा रही है। वहां देश-विदेश की अधिकांश तितलियों की प्रजातियां होंगी।– रविकांत कुमार(MR.RB)

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