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झारखंड में आयुष्मान भारत से नहीं मिलता लाभ निजी अस्पतालों का चयन गलत, हाईकोर्ट में याचिका दायर

News Desk
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झारखंड में प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों का चयन कर सूची में डाली गई है. उसमें गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए याचिकाकर्ता पंकज यादव ने जनहित याचिका दायर की है.

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क्या है प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना:

केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत हेल्थ स्कीम (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना यानी PM-JAY ) है. इससे देश के गरीब लोगों को भी बड़े अस्पतालों में इलाज कराने की सुविधा मिलेगी. PM-JAY वास्तव में भारत सरकार द्वारा पेश की गयी हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम है. इलाज का खर्च हेल्थ इंश्योरेंस लेने वाले व्यक्ति को नहीं देना होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड की राजधानी रांची से PM-JAY योजना लॉन्च किया था. प्रधानमंत्री ने कहा कि 5 लाख हेल्थ बीमा वाली जन आरोग्य स्कीम ( PM-JAY) का लाभ 10 करोड़ परिवारों को मिलेगा।

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PM-JAY का मकसद गरीब, वंचित ग्रामीण परिवारों और शहरी श्रमिकों के परिवारों की चिन्हित कैटेगरी को हेल्थ बीमा का लाभ देना है. इसलिए 2011 की जनगणना को आधार मानें तो 8.03 ग्रामीण परिवार और 2.33 करोड़ शहरी परिवार इस स्कीम के दायरे में आएंगे।

झारखंड में निजी अस्पतालों की सूचि में गड़बड़ी का आरोप:

झारखंड में प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों का जो चयन कर सूची में डाली गई है, उसमें गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए याचिकाकर्ता पंकज यादव ने जनहित याचिका दायर की है. याचिकाकर्ता पंकज यादव ने कहा कि निजी अस्पतालों का चयन कर सूची में डालनेे के बदले में घूस लिया गया है, इसलिए इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए. इसी मांग को लेकर याचिकाकर्ता पंकज यादव ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है.

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निजी अस्पतालों के चयन में अनियमिता की जाँच सीबीआई से कराने की मांग:

पंकज ने अदालत से मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है. याचिका में ईडी, सीबीआई और राज्य सरकार को प्रतिवादी बनाया गया है. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता राजीव कुमार ने याचिका के माध्यम से आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार के प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना में झारखंड के एडिशनल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और नेशनल इंश्योरेंस ने मिली-भगत करके करोड़ों रुपए की गड़बड़ी की है.

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