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कौन है बिहार की उपमुख्यमंत्री रेणु देवी, Dy. CM बनने के बाद क्यों है चर्चा में

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नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर सातवीं बार शपथ ग्रहण कर चुके हैं उनके साथ नई कैबिनेट मंत्रियों ने भी शपथ ग्रहण कर चुके हैं इस बार बिहार में सुशील मोदी उप मुख्यमंत्री के तौर पर दिखाई नहीं देंगे बल्कि उनकी जगह दो लोगों ने ले ली है जिनमें रेनू देवी का भी नाम शामिल है रेनू देवी को नीतीश की सरकार में उप मुख्यमंत्री बनाया गया है जिसके बाद से वे काफी चर्चा में है रेनू देवी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वे बिहार के इतिहास में पहली बार कोई महिला मुख्यमंत्री के रूप में का बीज हुए हैं. अखिल वो क्यों चर्चा में है आइए जानते हैं

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नीतीश कुमार के सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाई गई रेनू देवी बिहार के पश्चिमी चंपारण के बेतिया शहर से भाजपा विधायक है रेनू देवी का सियासी सफर दुर्गावाहिनी से शुरू हुआ है. इंटरमीडिएट और बीए की शिक्षा ग्रहण करने वाली रेनू देवी का हिंदी अंग्रेजी भोजपुरी और बांग्ला भाषा पकड़ है रेनू देवी का जन्म 1 नवंबर 1959 को हुआ था.

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ऐसा कहा जाता है कि बचपन से ही रेनू देवी का जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से रहा है लेकिन चंपारण और उत्तर बिहार को कार्यक्षेत्र बनाकर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के हक के लिए लड़ना उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत थी रेणु देवी 1988 में भाजपा दुर्गा वाहिनी के जिला संयोजक रह चुकी हैं. राम मंदिर आंदोलन में 500 महिलाएं कार्यकर्ताओं के साथ गिरफ्तार भी हो चुकी है. इसके बाद 1989 में रेनू देवी को भाजपा महिला मोर्चा का अध्यक्ष चुना गया 1990 में तिलगुल प्रमंडल में महिला मोर्चा के प्रभारी बनाई गई रेनू देवी यहीं नहीं रुके बल्कि एक कदम और बढ़ते हुए 1981 में प्रदेश महिला मोर्चा की महामंत्री बनी और 1992 में जम्मू कश्मीर तिरंगा यात्रा में शामिल हुए इसके बाद 1993 में भाजपा ने उन्हें उन्हें बिहार प्रदेश महिला मोर्चा का अध्यक्ष चुना जिसके बाद 1986 में फिर महिला मोर्चा की अध्यक्ष बने और 2014 में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चुने गए

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रेणु देवी ने अपने राजनीतिक जीवन में पहला चुनाव 1995 में नौतन विधानसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार के रूप में लड़ा है 2000 में बेतिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ी और जीती 2005 फरवरी 1 नवंबर में बेतिया से फिर विधायक बनी वहीं 2007 में बिहार की कला संस्कृति मंत्री भी रह चुकी हैं इसके बाद 2010 में भी रेनू देवी विधायक बन चुके हैं 2015 में कांग्रेस के मदन मोहन तिवारी ने उन्हें चुनाव हरा दिया था लेकिन 2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर विद्या से कांग्रेस के मदन मोहन तिवारी को हराकर व फिर एक बार विधायक बनी है.

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