कोल इंडिया ने अधिग्रहित जमीन के 250 करोड़ दिए, CM ने कहा झारखंड की पहली जीत

News Desk
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झारखंड में कई सरकारे आई और गई लेकिन कोल इंडिया से कोई भी सरकार खनन के लिए कोल इंडिया द्वारा अधिग्रहित की गई जमीनों का मुआवजा वसूल नहीं पाया था. परन्तु जो राज्य के 20 वर्षो में नहीं पाया वो राज्य की हेमंत सरकार ने अपने छः माह के कार्यकाल में ही कर दिखाया।

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अधिग्रहित की गयी जमीन के बदले में पहली बार राज्य सरकार मिली राशि:

झारखंड में कोल इंडिया का एक बड़ा हिस्सा कार्यरत है. कोयला खनन के लिए कोल इंडिया द्वारा राज्य की जमीने अधिग्रहित की जाती रही लेकिन उनका मुआवजा राज्य सरकार को अब तक नहीं मिल पाया था. कोयला खनन के लिए अधिग्रहित की गई जमीनों के बदले राज्य सरकार को 250 करोड़ रुपए के रूप में पहली क़िस्त मिली है. जबकि राज्य की हेमंत सरकार द्वारा इसके लिए 8,000 करोड़ रुपए की मांग की गई है.

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केंद्रीय मंत्री ने हेमंत सोरेन को सौपा चेक:

केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गुरुवार झारखंड दौरे पर आए थे, जहाँ उन्होंने राज्य में कार्यरत CCL, BCCL जैसे कंपनियों के साथ बैठक की और आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श हुआ. लेकिन इन सब के बीच सबसे बड़ी चीज़ जो हुआ वो राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ बैठक है. केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री के साथ बैठक कर राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच जारी समन्वय की कमी को दूर करने की कोशिश की गई. उनके साथ केंद्रीय जनजातीय कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा भी थे.

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केंद्रीय कोयला मंत्री के साथ बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पिछले 10 वर्ष (अप्रैल 2009 से 31 मार्च 2020) तक के दौरान कोल इंडिया द्वारा अधिग्रहित की गयी 14296 एकड़ सरकारी भूमि के एवज में 5439 करोड़ तथा 5298 एकड़ जंगल-झाड़ भूमि के लिए 2787 करोड़ रुपये की मांग की है. इसके एवज में राज्य सरकार को पहली बार 250 करोड़ दी गई. साथ ही भरोषा दिया गया की मामले के सत्यापन के बाद शेष राशी का भी भुगतान जल्द कर दिया जायेगा।

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राज्य का हक, जिसे सरकार हर हाल में ले कर रहेगी:

मुख्यमंत्री ने रेलवे द्वारा राज्य से बाहर जाने वाले कोयले पर सवाल खड़े करते हुए कहा की राज्य से रेलवे के द्वारा कितना कोयला निकलता है इसकी कोई जानकारी राज्य सरकार के पास नहीं है. रेलवे से बाहर जाने वाले कोयले पर राज्य को राशि मिलनी चाहिए वो भी नहीं मिल पाता है. हमने राज्य सरकार के डिजिटल पोर्टल और रेलवे पोर्टल को जोड़ने की मांग रखी है ताकि सही तरीके से रॉयल्टी मिल सके.

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