झाविमो से भाजपा में गए नेताओं को नई प्रदेश कमिटी में तरजीह नहीं ! भितरखाने जारी है मंथन का दौर

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14 साल पूर्व भाजपा से अलग होकर झारखंड विकास मोर्चा का गठन किया गया था. भाजपा छोड़ने के बाद बाबूलाल मरांडी के करीब रहने वाले नेता उनके साथ झाविमो मे चले आये. राजनितिक उठा-पटक के बावजूद बाबूलाल के करीबी नेताओ ने उनका साथ नहीं छोड़ा और हर मोर्चे पर बाबूलाल के साथ डटे रहे. 14 साल तक झाविमो के साथ संघर्ष का दौर चला लेकिन इस बीच झाविमो कभी सत्ता का सुख नहीं भोग सकी.

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2019 के विधानसभा चुनाव में 10 से अधिक सीटे जीत कर गेम चेंजर बनने की उम्मीद रखने वाली झाविमो के इरादों पर पानी फिर गया और हेमंत सोरेन वाली यूपीए गठबंधन को जनता ने भरपूर जनसमर्थन दिया। 2019 विधानसभा चुनाव में झाविमो ने 3 सीटों पर जीत हासिल की जिसमे प्रदीप यादव, बंधू तिर्की और पार्टी अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी शामिल थे.

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14 साल के वनवास को ख़त्म करने के लिए बाबूलाल मरांडी ने भाजपा में झाविमो के विलय का फैसला किया लेकिन पार्टी के अन्य दो विधायक प्रदीप यादव और बंधू तिर्की ने भाजपा में जाने से साफ़ मना कर दिया जिसके बाद दोनों विधायकों को धीरे-धीरे कर पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया और भाजपा में झाविमो के विलय का रास्ता साफ़ हुआ. फरवरी माह में तत्कालीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की उपस्थिति में बाबूलाल मरांडी ने झाविमो का भाजपा में विलय करते हुए भाजपा में घर वापसी कर गए, उनके साथ हर कदम पर साथ चलने वालो ने भी भाजपा का दमन थाम लिया।

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प्रदेश भाजपा की नई कमेटी में नेताओं के चयन को लेकर अलग-अलग खेमे में भारी हलचल है। सबसे ज्यादा सुगबुगाहट पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के समर्थकों में है। बाबूलाल मरांडी लगभग 14 साल बाद भाजपा में इस आस में आए हैं कि उनके साथ-साथ आए विश्वस्तों को संगठन में तरजीह मिलेगी। विलय के मौके पर पूर्व अध्यक्ष अमित शाह ने खुले मंच से एलान किया था कि हर स्तर पर सांगठनिक ढांचे में मोर्चा के लोगों को हिस्सेदारी मिलेगी।

यह कयास लगाया जा रहा था कि बाबूलाल के करीबी नेताओं को प्रमुख पदों पर काम करने का मौका मिलेगा, लेकिन कमेटी में प्रमुखता नहीं मिलने से ऐसे नेताओं में निराशा है। वे लगातार बाबूलाल मरांडी से गुहार लगा रहे हैं। मरांडी भी खुद असहज बताए जाते हैं।

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बाबूलाल के करीबियों में से मात्र तीन लोगो को ही प्रमुखता से भाजपा की नई प्रदेश कमिटी में जगह मिली है परन्तु इससे भी वो खुश नहीं है. बाबूलाल मरांडी के साथ झाविमो में केंद्रीय उपाध्यक्ष रहीं शोभा यादव समेत रमेश राही, सिमरिया के रामदेव भोक्ता, गिरिडीह के सुरेश साव आदि नेता बाबूलाल मरांडी के गुडबुक में थे, लेकिन इन्हेंं स्थान नहीं मिला।

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